इसरो ने लांच किया जीसैट-7ए सैटेलाइट, बढ़ेगी वायुसेना की ताकत

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने आज एक और शानदार कामयाबी दर्ज कर ली है। इसरो ने आज अपने कम्युनिकेशन सैटलाइट जीएसएलवी-एफ11/ GSAT-7A को सफलता पूर्वक लॉन्च कर दिया।

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने आज एक और शानदार कामयाबी दर्ज कर ली है। इसरो ने आज अपने कम्युनिकेशन सैटलाइट जीएसएलवी-एफ11/ GSAT-7A को सफलता पूर्वक लॉन्च कर दिया। इस सैटेलाइट को आंध्र प्रदेश स्थित श्रीहरिकोटा स्पेस स्टेशन से लांच किया गया। इस कम्यूनिकेशन सैटेलाइट से सबसे ज्यादा फायदा भारतीय वायुसेना को होगा। इसके खास फीचर्स भारतीय वायुसेना को काफी मदद करेंगे। इसे पृथ्वी के जियो ऑर्बिट (कक्षा) में स्थापित किया जाएगा।

इसरो ने लांच किया जीसैट-7ए सैटेलाइट, बढ़ेगी वायुसेना की ताकत

इसरो द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार लॉन्च होने के केवल 19 मिनट बाद ही, जीएसएलवी राकेट 2,250 किग्रा वाले जीसैट-7ए को भूस्थैतिक स्थानांतरित कक्षा (जीटीओ) में स्थापित किया। आपको बता दें कि Gsat-7A का निर्माण ISRO द्वारा किया गया है, ये सैटेलाइट आठ साल तक काम करेगा। इसके अलावा GSAT-7A से वायुसेना के एयरबेस इंटरलिंक होंगे। इसके जरिए ड्रोन ऑपरेशंस में भी मदद मिलेगी। इस सैटेलाइट से ड्रोन आधारित ऑपरेशंस में एयरफोर्स की ग्राउंड रेंज में खासा इजाफा हो जाएगा।

इसरो ने लांच किया जीसैट-7ए सैटेलाइट, बढ़ेगी वायुसेना की ताकत

अब और ताकतवर होगी भारतीय वायुसेना:

इस सैटेलाइट के कक्षा में स्थापित होने के बाद से ही भारतीय वायुसेना की ताकत में इजाफा हो जायेगा। सुरक्षा और तकनीकी की दृष्टी से इसरो द्वारा उठाया गया ये एक बेहद ही शानदार कदम है।

इसरो ने लांच किया जीसैट-7ए सैटेलाइट, बढ़ेगी वायुसेना की ताकत

इस सैटेलाइट से ग्राउंड रडार स्टेशन, एयरबेस और AWACS एयरक्राफ्ट को इंटरलिंक करने में काफी मदद मिलेगी। इसके अलावा यदि भारतीय वायुसेना भविष्य में किसी ग्लोबल ऑपरेशन को अंजाम देती है तो उस दौरान भी इस सैटेलाइट की मदद से सेना को खासी मदद मिलेगी। इस सैटेलाइट की मदद से न सिर्फ एयरबेस इंटरलिंक बल्कि ड्रोन ऑपरेशन, मानवरहित एरियल व्हीकल (UAV) की ताकत भी बढ़ जायेगी।

इसरो ने लांच किया जीसैट-7ए सैटेलाइट, बढ़ेगी वायुसेना की ताकत

जानें जीसैट-7ए सैटेलाइट की विशेषताएं:

  • इस सैटेलाइट पर कुल 500 से 800 करोड़ रुपये की लागत लगी है।
  • ये सैटेलाइट मिशन 8 वर्षों तक चलेगा।
  • इस सैटेलाइट का कुल वजन 2250 किलोग्राम है।
  • इससे न केवल वायु सेना बल्कि थल सेना के ताकत के इजाफे में मदद मिलेगी।
  • इसकी मदद से वायुसेना अपने ग्राउंड रडार स्टेशन, एयरबेस और एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) एयरक्राफ्ट को इंटरलिंक कर सकेगी।
  • इसकी मदद से ड्रोन बेहतर तरीके से सर्विलांस करेंगे इसके अलावा वह तस्वीरों और वीडियो को ग्राउंड स्टेशनों पर निरंतर भेजेंगे।
  • यह भारतीय क्षेत्र में केयू-बैंड के यूजर्स को संचार क्षमताएं मुहैया कराएगा
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    गौरतलब है कि इससे पहले भी इसरो ने नेवी के लिए रुकमणी लॉन्च किया था। बता दें कि, दुनिया में अमेरिका, रूस और चीन जैसे देश ही अभी तक अपनी सेना के लिए सैटेलाइट लॉन्च कर चुके हैं। इस सैटेलाइट में 4 सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिनके जरिए करीब 3.3 किलोवॉट बिजली पैदा की जा सकती है। इसके साथ ही इसमें कक्षा में आगे-पीछे जाने या ऊपर जाने के लिए बाई-प्रोपेलैंट का केमिकल प्रोपल्शन सिस्टम भी दिया गया है।

    इसरो ने लांच किया जीसैट-7ए सैटेलाइट, बढ़ेगी वायुसेना की ताकत

    इस सैटेलाइट की एक और विशेषता ये है कि इसकी मदद से एयरबेस और अवाक्स स्पेसक्राफ्ट भी आपस में आसानी से बातचीत कर सकेंगे। जिससे उनकी कम्यूनिकेशन प्रणाली और भी बेहतर हो सकेगी। आपको बता दें कि, ये अवाक्स विमान हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली का ही हिस्सा होते हैं। इसके अलावा यह 400 वर्गकिमी एरिया में दुश्मन की हरकत पर नज़र रख सकने वाला सिस्टम है।

    इसरो ने लांच किया जीसैट-7ए सैटेलाइट, बढ़ेगी वायुसेना की ताकत

    दुनिया भर में कितने है मिलिट्री सैटेलाइट:

    वर्तमान में, 320 मिलिट्री सैटेलाइट पृथ्वी के चारो तरफ परिक्रमा कर रहे हैं। जिसमें से आधे अमेरिका के हैं और अन्य रूस और चीन के हैं। चीन एक ऐसा मुल्क है जो भारत को अपना सबसे निकटवर्ती प्रतिद्वंदी मानता है। इसके लिए उसने कई ऐसे मिलिट्री सेटेलाइट को लांच किया है जो कि पृथ्वी की कक्षा में घूम रहे हैं। इन सैटेलाइटों की मदद से ये गैर मुल्कों के सरहदों पर होने वाले गतिविधियों पर नजर रखते हैं। बीते साल 2017 में चीन ने जनवरी माह में एंटी सैटेलाइट हथियारों का परीक्षण भी किया था। अन्य देशों द्वारा तेजी से किये जा रहे इन प्रयोगों को देखते हुए भारत के लिए ये जरूरी हो गया था कि वो भी अंतरीक्ष में अपनी ताकत दिखाये।

Article Published On: Thursday, December 20, 2018, 9:00 [IST]
English summary
Why Isro's Gsat-7A launch is important for the Indian Air Force. Read in Hindi.
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