हवाई जहाज में सफर करते समय क्यों लगती है ठंड? जानें क्या है वजह
अपने कभी न कभी हवाई जहाज में सफर तो किया ही होगा। फ्लाइट में सफर करते समय आपने ठंड से बचने के लिए स्वेटर या कंबल का भी इस्तेमाल किया होगा। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि फ्लाइट के अंदर का तापमान इतना ठंडा क्यों होता है? आपको बता दें कि ऐसा सिर्फ इसलिए नहीं होता क्योंकि फ्लाइट के अंदर लोगों को गर्मी लगती है, बल्कि तापमान ठंडा रखने के कई और कारण भी हैं। यहां हम आपको बताएंगे उन्हीं कारणों के बारे में जिस वजह से फ्लाइट के केबिन को ठंडा रखा जाता है।

इस वजह से केबिन रहता है ठंडा
हवाई जहाज के केबिन को ठंडा रखने के कई वजह हैं। उनमें से ही एक वजह है गर्म तापमान से उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या, जिस वजह से फ्लाइट में यात्रियों की तबियत बिगड़ने की अधिक संभावना होती है। आपको बता दें कि उड़ान के दौरान हवाई जहाज के केबिन के अंदर हवा का दबाव कम हो जाता है। इससे केबिन में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। अगर केबिन के अंदर का तापमान अधिक हो तो यह ऑक्सीजन की कमी को और बढ़ा देता है।

अगर उड़ान के दौरान केबिन में ऑक्सीजन की कमी हो गई तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ऑक्सीजन की कमी से यात्री बेहोश हो सकते हैं और बुजुर्गों में यह खतरा और भी बढ़ जाता है। हवाई सफर करने वाले कई यात्रियों में हाइपोक्सिया के लक्षण देखे जाते हैं। ऐसे यात्री कम ऑक्सीजन और हवा के कम दबाव के कारण बेहोश हो जाते हैं।

इस स्थिति से बचने के लिए फ्लाइट अटेंडेंट यात्रा के दौरान केबिन के अंदर हवा के दबाव और ऑक्सीजन की मात्रा को लगातार नियंत्रित करते रहते हैं। नए हवाई जहाजों ऐसे कई आधुनिक तकनीक से लैस होते हैं जो हवा के दबाव और ऑक्सीजन की मात्रा को अपने आप नियंत्रित करते हैं।

हवाई जहाज के अंदर कितना होता है तापमान
हवाई जहाज के अंदर का तापमान जगह के अनुसार बदलता रहता है। ठंडे देशों में फ्लाइट केबिन का तापमान ज्यादा ठंडा नहीं रखा जाता, वहीं भारत जैसे गर्म देशों में यह आमतौर पर 22-24 डिग्री होता है। यह ज्यादा ठंडा नहीं है लेकिन उड़ान के दौरान शरीर में हलचल नहीं होती इसलिए ठंड ज्यादा लगती है।

क्या तापमान के लिए भी है कोई कानून?
दरअसल, फ्लाइट केबिन में तापमान के लिए कोई कानून नहीं है। जैसा की हमनें पहले ही बताया कि दुनिया भर की एयरलाइन कंपनियां अलग-अलग तामपान नियंत्रण के नियमों का पालन करती हैं। यह नियम एयरलाइन कंपनियां खुद बनाती हैं और फ्लाइट रूट के मौसम और तापमान के अनुसार बदलती रहती हैं। भारत में भी एयरलाइन कंपनियां इसी तरह के नियमों का पालन करती हैं।

आपको बता दें कि एयरप्लेन के वायुमंडल से बाहर जाने के बाद कुछ देर तक ऐसी बंद कर दिया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि वायुमंडल के ऊपर हवा के कम दबाव के कारण तापमान पहले से ही ठंडा होता है, इसलिए एयरप्लेन को ज्यादा ठंडा करने की जरूरत नहीं पड़ती है।


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