इस व्यक्ति ने चाँद में पहली बार चलाई थी कार, अपोलो 15 मिशन का थे हिस्सा
भारत की लूनर मिशन चन्द्रयान 3 का विक्रम लैंडर सफलतापूर्वक चन्द्रमा पर लैंड कर चुका है और इसके साथ ही भारत चाँद पर पहुँचने वाले देशों में शामिल हो गया है। इसके पहले सिर्फ अमेरिका, रूस व चीन ही यह करने में कामयाब हुए थे।
इस खास मौके पर हम आपके लिए चाँद पर कार चलाने वाले पहले व्यक्ति की जानकारी लेकर आये है। यह अमेरिका के अपोलो 15 मिशन का हिस्सा था और इन्होंने चाँद पर एक खास कार चलाई थी। इस व्यक्ति का नाम डेविड रैंडॉल्फ स्कॉट है।

6 जून, 1932 को एक अमेरिकन इंजीनियर, टेस्ट पायलट व नासा एस्ट्रोनॉट, डेविड रैंडॉल्फ स्कॉट का जन्म हुआ था। अपोलो 15 मिशन के कमांडर होने के नाते वह चाँद पर चलने वाले सातवें व्यक्ति है, इससे भी बड़ी बात वह चाँद पर कार चलाने वाले पहले व्यक्ति बने थे।
26 जुलाई, 1971 को सकॉट, लूनर मॉड्यूल पायलट जेम्स इर्विन, तथा कमांड मॉड्यूल पायलट अल्फ्रेड वर्डेन को अपोलो 15 फ्लाइट के माध्यम से लॉन्च किया गया था। करीब 3.5 दिनों की यात्रा के बाद उन्होंने चाँद पर लैंडिंग की थी।

रोवर-1 की मदद से वह खुद को व उपकरणों को ट्रांसपोर्ट किया करते थे। क्रू ने आसपास के इलाकों का परीक्षण किया तथा 82 किलोग्राम चाँद की सतह का मटेरियल लेकर आये थे। सकॉट ने लूनर रोविंग व्हीकल चाँद पर चलाया था।
यह वाहन 1.5 मीटर × 0.5 मीटर जितनी जगह पर फोल्ड किया जा सकता था। इसका वजन 209 किलोग्राम था, और दो एस्ट्रोनॉट व उनके उपकरणों के साथ इसका वजन 700 किलोग्राम तक चला जाता था।

हर पहिये को 200 वाट इलेक्ट्रिक मोटर की मदद से स्वतंत्र रूप से चलाया जा सकता था। भले ही दोनों में से किसी भी एस्ट्रोनॉट द्वारा चलाया जा सकता था, लेकिन इसे हमेशा कमांडर ने ही चलाया। यह 10 से 12 किमी/घंटा की स्पीड तक चलाई जा सकती थी।
ऐसे में यह पहली बार था कि जब एस्ट्रोनॉट अपने लैंडर से दूर जा सकते थे और फिर भी उनके पास वैज्ञानिक परीक्षण करने का समय होता। इस एलआरवी को सिर्फ 17 महीने के समय में तैयार किया गया था।
इस एलआरवी की मदद से एस्ट्रोनॉट ने तीन अलग अलग रास्तों पर 28 किलोमीटर का सफर तय किया और अपने लैंडर के बाहर 17 घंटे से भी अधिक समय बिताया। इसके बाद अपोलो 15 मिशन के एस्ट्रोनॉट 7 अगस्त को धरती पर वापस आ गए।


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