क्या है CAT III Technology? घने कोहरे के दौरान विमान लैंडिंग के लिए कैसे है उपयोगी? जानिए डिटेल्स
घने कोहरे के कारण देश के कई हिस्सों में उड़ानें देरी से चल रही हैं। सर्दी में विमान की यात्रा करते वक्त आपने अक्सर इस समस्या को झेला होगा। रिपोर्ट के मुताबिक कोहरे के कारण दिल्ली हवाईअड्डे पर औसतन 100 उड़ानों में देरी हो रही है।
इसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानें शामिल है। दिसंबर और जनवरी के महीने में घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी कम होती है। इसके कारण कई उड़ानें विलंबित होती हैं वहीं कई उड़ानें पूरी तरह से रद्द कर दी जाती हैं।

ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए हवाई अड्डे के परिचालन में CAT III टेक्नोलॉजी की मदद ली जाती है। एयरपोर्ट पर CAT III के तहत फिर इन फ्लाइट को उड़ाया जाता है।
ये एक तरह का नेविगेशन सिस्टम है जो न्यूनतम 50 मीटर की विजिबिलिटी के साथ लैंडिंग की अनुमति देता है। दिल्ली में इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट में एंटी-फॉग लैंडिंग सिस्टम लगा हुआ है, जिसे CAT IIIB इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) कहा जाता है। ILS एक गाइडेंस सिस्टम है।

यह सिस्टम रेडियो सिग्नल और कभी-कभी हाई इंटेंसिटी लाइटिंग की मदद से विमानों को कम विजिबिलिटी होने पर भी लैंड करने में मदद करता है। CAT IIIB नेविगेशन प्रणाली प्रतिकूल मौसम की स्थिति जैसे घने कोहरे और खराब विजिबिलिटी में विमान को उतरने की अनुमति देती है।
रिपोर्ट के मुताबिक एक एयरपोर्ट पर CAT IIIB सिस्टम स्थापित करने की शुरुआती लागत 10 करोड़ रुपये तक जा सकती है और रखरखाव लागत मासिक आधार पर लगभग 50 लाख रुपये तक जा सकती है।

हाल ही में कोलकाता हवाई अड्डे पर CAT IIIB सिस्टम 130 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किया गया है। जब घने कोहरे या अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण रनवे पायलट को दिखाई नहीं देता है।
तब यह CAT III B नेविगेशन सिस्टम पायलट को जमीन से 100 मीटर ऊपर तक मार्गदर्शन करता है। इस CAT IIIB सिस्टम के जरिए जब विमान जमीन से 50 फीट ऊपर पहुंच जाएगा तो वह टचडाउन जोन लाइटिंग सिस्टम के जरिए लैंड करेगा। ये पूरा प्रोसेस ऑटोमेटेड होता है।

साथ ही एक वॉयस प्रॉम्प्ट उलटी गिनती का उपयोग करके बताता है कि विमान रनवे से कितनी दूर है, फ्लैप को कब तैनात करना है और कब ब्रेक लगाने की जरूरत है।
इसलिए, जो फ्लाइट CAT IIIB के अनुरूप नहीं हैं, वे उन क्षेत्रों में नहीं चलाई जा सकती हैं जहां कोहरा या कम विजिबिलिटी है। दिल्ली एयरपोर्ट पर पहले से ही यह व्यवस्था है।
इसके अलावा अमृतसर, लखनऊ और कोलकाता हवाई अड्डों पर यह विशेष नेविगेशन प्रणाली शुरु कर दी गई है। एयरलाइंस कंपनियों को इस नेविगेशन प्रणाली का प्रमाणन प्राप्त करना आवश्यक है।
इसके अलावा एयरलाइंस को अपने पायलटों को इस CAT IIB नेविगेशन सिस्टम के लिए प्रशिक्षित करना होगा। इस तकनीक के बिना विमान कोहरे और कम दृश्यता वाले क्षेत्रों में नहीं उतर सकते। बता दें कि इंडिगो और विस्तारा एयरलाइंस के पास यह सिस्टम पहले से है।


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