जानिए क्या है इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी स्वैपिंग, घंटों समय की होगी बचत
प्रदूषण मुक्त वातावरण के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बेहतर है, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ सबसे बड़ी समस्या इन्हें चार्ज करने की है। एक इलेक्ट्रिक वाहन को चार्ज करने में कम से कम एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है। इसके अलावा, देश में हर जगह इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध भी नहीं हैं जिसके वजह से इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग सीमित हो जाता है।

हालांकि, आजकल के इलेक्ट्रिक वाहनों में मिलने वाली बैटरी स्वैपिंग तकनीक काफी हद तक इस समस्या का समाधान करने में कारगर है। बैटरी स्वैपिंग से बैटरी को चार्ज करने का समय बचाया जा सकता है और चंद मिनटों में पूरी चार्ज की हुई बैटरी आपके वाहन में लगा दी जाती है। आइये जानते हैं इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी स्वैपिंग की प्रक्रिया कैसे काम करती है-

बैटरी स्वैपिंग क्या है?
बैटरी स्वैपिंग या बैटरी एज-ए-सर्विस इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) मालिकों को स्वैप स्टेशनों पर डिस्चार्ज की गई बैटरी को चार्ज की गई बैटरी से बदलने की अनुमति देता है। जब बैटरी डिस्चार्ज हो जाती है, तो मालिक इसे पूरी तरह से चार्ज करके बदल सकता है। इससे चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की समस्या का समाधान होगा और ड्राइवरों की रेंज की चिंता भी कम होगी। इसके अलावा, बैटरी लीजिंग ईवी मालिकों को बैटरी खरीदने की लागत बचाने में मदद कर सकती है। बैटरी स्वैपिंग में चार्ज करने की तुलना में केवल कुछ मिनट लगते हैं जिससे कई घंटे बचाए जा सकते हैं। इसके लिए न्यूनतम बुनियादी ढांचे की भी आवश्यकता होती है।

यह कैसे काम करता है?
एक ईवी मालिक ऊर्जा ऑपरेटर के किसी भी आउटलेट पर जा सकता है और चार्ज की गई बैटरी को ले सकता सकता है। उसे बस चार्ज की गई बैटरी के सर्विस के लिए भुगतान करना होता है। यह प्रणाली उसी तरह है जैसे उपभोक्ता एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते हैं। ऊर्जा ऑपरेटर थोक में बैटरी खरीदता है और डिस्चार्ज की गई बैटरी को चार्ज करने के लिए चार्जिंग स्टेशन स्थापित करता है।

एक इलेक्ट्रिक स्कूटर की बैटरी को स्वैप करने में लगने वाला समय एक बाइक में ईंधन के भरने में लगने वाले समय के समान है। हालांकि, पेट्रोल वाहनों में किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन भरा जा सकता है, जबकि एक ईवी मालिक को बैटरी स्वैप करने के लिए हर बार अपने आउटलेट पर जाने के लिए एक विशिष्ट ऊर्जा ऑपरेटर के साथ एक समझौता करना होगा।

सरकार बना रही है प्रोत्साहन देने की योजना
केंद्र सरकार ने 1 फरवरी को पेश किये गए बजट 2022-2023 में बैटरी स्वैपिंग नीति लाने की घोषणा की है। केंद्र अगले दो महीनों के भीतर बजट में घोषित बैटरी स्वैपिंग नीति के तहत प्रोत्साहन को अंतिम रूप दे सकता है। नीति में तीन पहिया ऑटो रिक्शा, इलेक्ट्रिक स्कूटर और मोटरसाइकिल जैसे दोपहिया वाहनों के लिए बैटरी स्वैप सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करने की संभावना है।

पॉलिसी के तहत ईवी मालिकों को बैटरी के सब्सक्रिप्शन या लीज कॉस्ट पर 20 फीसदी तक का इंसेंटिव मिल सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रोत्साहन स्वच्छ वाहन खरीदने के लिए दिए जाने वाले प्रोत्साहनों से अधिक होगा।

खराब बैटरी का क्या होता है?
एक रिपोर्ट के अनुसार, 2021 और 2030 के बीच 12 मिलियन टन से अधिक लिथियम-आयन बैटरी के समाप्त होने की संभावना है। बैटरियों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे माल जैसे लिथियम, निकल और कोबाल्ट की आवश्यकता होती है जिनका पर्यावरणीय और मानव प्रभाव होता है। खराब बैटरी से बहुत सारा इलेक्ट्रॉनिक कचरा निकलता है इसलिए इन्हें ठीक तरह से रीसायकल करने की जरूरत होती है।

बैटरियों की कीमत को कम रखने और खनन पर निर्भरता कम करने के लिए, विशेषज्ञ इस बात पर काम कर रहे हैं कि खराब बैटरियों को रीसायकल कर बड़े पैमाने पर मूल्यवान धातुओं को कैसे निकाला जाए। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि रिसाइकिलिंग के बजाय वैकल्पिक क्षेत्रों में बैटरी को लंबे समय तक उपयोग में रखने के लिए एक बेहतर समाधान होगा।

हालांकि, रीसायकल की गई बैटरियों का इस्तेमाल दोबारा वाहनों में नहीं किया जाता, लेकिन इनका उपयोग सौर या पवन पॉवर प्लांट से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली के भंडारण के लिए किया जा सकता है।


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