अगर चलती ट्रेन में ड्राइवर सो जाए तो क्या होगा, जाने यहां
भारतीय रेल, यह भारत में यातायात का एक बहुत बेहतर और सस्ता साधन है। इसे काफी हद तक सुरक्षित भी कहा जा सकता है। हांलाकि कुछ कारणों की वजह से कभी-कभी रेल हादसे भी हो जाते हैं, लेकिन इन्हें रोकने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

अपनी क्लास के बच्चों को ये समझाते हुए सलिल आज रेलगाड़ी के बारे में बता रहा है। सलिल एक स्कूल में अध्यापक के रूप में काम करता है। वह क्लास में बच्चों को नई चीजें बताता रहता है। आज क्लास में किसी बच्चे ने रेलगाड़ी के बारे में पूछा था और वह उसी का जवाब दे रहा था।

अभी वह बच्चों को रेलगाड़ी के बारे में बता रही रहा था, कि क्लास के बीच में एक बच्चे ने हाथ खड़ा कर दिया। सलिल समझ गया कि उसके मन में कोई सवाल है। उसने खुद को रोकते हुए उस बच्चे से कहा, बताओ निखिल क्या पूछना चाहते हो?

उस बच्चे का नाम निखिल था। उसने अपना सिर खुजलाते हुए सलिल से कहा कि सर, रेलगाड़ियों के इतने एक्सीडेंट होते हैं तो ये भी तो हो सकता है कि रेलगाड़ी का ड्राइवर सो जाता हो और एक्सीडेंट हो जाता हो।

निखिल की बात सुनकर क्लास के सारे बच्चे जोर से हंसने लगे। लेकिन बच्चों को चुप कराते हुए सलिल ने कहा कि तुमने अच्छा सवाल पूछा है। हो सकता है कि ट्रेन के ड्राइवर को नींद आ जाए और वो सो जाए, आखिर वो भी इंसान ही है।

मैं ये तो नहीं बता सकता है कि ट्रेन चलाते हुए ड्राइवर सोते हैं या नहीं, लेकिन ये जरूर बता सकता हूं कि अगर ट्रेन चलाते हुए ड्राइवर सो जाए तो क्या होगा। इतने में क्लास के एक बच्चे की आवाज आई कि अगर ड्राइवर सो जाएगा तो एक्सीडेंट हो जाएगा।

सलिल ने उस बच्चे का जवाब देते हुए कहा, नहीं, ऐसा नहीं होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि ट्रेन चलाते हुए अगर ट्रेन का ड्राइवर कोई हरकत नहीं करता है तो 3 से 5 मिनट के अंदर ही ट्रेन अपने आप रुक जाती है।

ऐसा इसलिये होता है कि क्योंकि ट्रेन के इंजन में "डेड मैन्ज़ हैंड" नाम की एक डिवाइस लगी होती है। जब ट्रेन एक रफ्तार पर काफी देर तक चलती रहती है तो ड्राइवर को इस डिवाइस को 2 से 3 मिनट के बीच में दबाना पड़ता है।

इसे दबाने से ट्रेन के इंजन को पता चलता रहता है कि ड्राइवर पूरी तरह से सक्रिय है। लेकिन अगर ट्रेन की रफ्तार में लगातार परिवर्तन हो रहा है या बार-बार ब्रेक लगाया जा रहा है तो इंजन को यह पता चलता रहता है कि ड्राइवर जागा हुआ है और डिवाइस को दबाना नहीं पड़ता है।

ऐसा ज्यादातर मालगाड़ी के ड्राइवर के साथ होता है, क्योंकि उनको लंबी दूरी की यात्रा करनी होती है और मालगाड़ी काफी धीमी रफ्तार पर चलती है, जिससे उन्हें नींद आ जाती है। ऐसे में यही डिवाइस रेलगाड़ी को दुर्घटना से बचाती है।

तो बच्चों अब तो तुम सबको पता चल ही गया होगा कि रेलगाड़ी का ड्राइवर अगर सो जाए तो भी ट्रेन का एक्सीडेंट नहीं होगा। तभी अचानक स्कूल की बेल बजने की आवाज आती है और सलिल बच्चों को होमवर्क देकर क्लास से चला जाता है।


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