West Bengal Train Accident: क्या सिग्नल ओवरशूट की वजह से हुई इतने लोगों की मौत! जानें इसके पीछे की सच्चाई?
West Bengal Train Accident : पश्चिम बंगाल में एक मालगाड़ी और कंचनजंगा एक्सप्रेस (13174) की टक्कर में करीब 15 लोगों की मौत हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक 25-30 लोग घायल हैं। यह भारत में इस साल का सबसे भीषण रेल हादसा है। कंचनजंगा एक्सप्रेस अगरतला से पश्चिम बंगाल के सियालदह जा रही थी। इस दौरान न्यू जलपाईपुरी में हादसा हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक कंचनजंगा एक्सप्रेस ट्रेन के समान ट्रैक पर पीछे से एक मालगाड़ी आ कर टकरा गई है। इस घटना में कंचनजंगा एक्सप्रेस के आखिरी दो डिब्बे पटरी से उतर गए। इससे उसमें सवार यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए।

इस घटना में करीब 15 लोगों की मौत हो गई। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि दो लोको पायलट और एक गार्ड की भी मौत की खबर आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक मालगाड़ी के लोको पायलट द्वारा सिग्नल ओवरशूट करने के कारण हादसा हुआ है।
फिलहाल घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद, रेस्क्यू ऑपरेशन में NDRF और SDRF समेत स्थानीय अधिकारी तत्परता से जुटे हुए हैं। बता दें कि जिस इलाके में हादसा हुआ, वहां ऑटोमैटिक सिग्नल सिस्टम है।

इस क्षेत्र में सिग्नल को ऑपरेट करने के लिए किसी मैनुअल इनपुट की आवश्यकता नहीं है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक मालगाड़ी के लोको पायलट ने सिग्नल को नजरअंदाज किया है, जिसकी वजह से दुर्घटना हुई है। तकनीकी भाषा में इसे सिग्नल ओवरशूट कहा जाता है।
क्या होता सिग्नल ओवरशूट : दरअसल जब कोई ट्रेन चालक रेड सिग्नल को मानवीय भूल के कारण नजरअंदाज करता है, तो इसे सिग्नल ओवरशूट कहा जाता है। इस घटना में जिस ट्रैक पर कंचनजंगा ट्रेन चल रही थी उस पर आने वाली मालगाड़ी को रेड सिग्नल दे दिया गया था।

लेकिन मालगाड़ी के ड्राइवर ने शायद इसे नजरअंदाज कर दिया और आगे बढ़ गया, जिसके बाद आगे जाकर वह कंजनजंगा ट्रेन के पिछले हिस्से से टकरा गई। हालांकि इसमें ड्राइवर की गलती नहीं भी हो सकती है।
क्योंकि सिग्नल ओवरशूट कई बार अन्य कारणों से भी हो सकता है। चूकि इस रूट पर ऑटोमैटिक सिग्नल लगा हुआ है और वर्तमान वहां मौसम भी ठीक नहीं है, लिहाजा टेक्निकल फॉल्ट होने की भी संभावना है।
अत्याधुनिक सिग्नल सिस्टम के बावजूद हो रहा हादसा: किसी भी ट्रेन के परिचालन में ट्रेन का सिग्नल अहम भूमिका निभाती है। अक्सर रेल हादसे की बड़ी वजह सिग्नल इंटरलॉकिंग सिस्टम में गड़बड़ी की वजह से होती है।
भारतीय रेलवे में इंटरलॉकिंग सिस्टम, सिग्नल देने में उपयोग होने वाली महत्वपूर्ण प्रणाली है। अर्थात यह ट्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक सिस्टम है। इसके जरिए रेलवे स्टेशनों, जंक्शनों और सिग्नलिंग बिंदुओं पर ट्रेन की आवाजाही को सुरक्षित और कुशल संचालन के लिए फंक्शंस कंट्रोल किए जाते हैं।
कुल मिलाकर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग एक ऐसा सिस्टम है, जो ट्रेन की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करता है। इस सिस्टम का प्रयोग रेल लाइन पर ट्रेनों की आवाजाही के समयनुसार उचित सिग्नल देने के लिए किया जाता है।
कैसे काम करता है सिग्नल इंटरलॉकिंग सिस्टम : दरअसल, रेलवे का यह सिस्टम इलेक्ट्रॉनिक बेस्ड है और यह ट्रेनों को सुरक्षित रूप से लाइन चेंज करने की अनुमति देता है और उसे कंट्रोल भी करता है।
रेल दुर्घटना रोकने के लिए कवच System का प्रयोग : पिछले साल ओडिशा में हुए बालासोर रेल हादसे के बाद भारतीय रेलवे का कवच सिस्टम काफी चर्चा में है। दरअसल ये भारतीय रेलवे का स्वचालित सुरक्षा प्रणाली सिस्टम है, जिसके जरिए रेलवे हादसों को कम किया जा सकता है।
इसे स्टेशन पर एक किलोमीटर की दूरी पर इंस्टॉल किया जाता है, इसके साथ ही इसे ट्रेन, ट्रैक और रेलवे सिग्नल सिस्टम में भी इंस्टॉल किया जाता है। यह पूरा सिस्टम एक दूसरे कंपोनेंट्स से अल्ट्रा हाई रेडियो फ्रिक्वेंसी के जरिए कम्युनिकेट करता है।
जब भी लोकोपायलट रेलवे सिग्नल को जंप करता है तो यह कवच सिस्टम एक्टिव हो जाता है। एक्टिव होते ही कवच सिस्टम लोकोपायलट को अलर्ट करता है और फिर ट्रेन के ब्रेक्स को कंट्रोल करने लगता है।
कवच सिस्टम को अगर पता चल जाता है कि एक ही पटरी पर दूसरी ट्रेन भी आ रही है, तो वह दूसरी ट्रेन को अलर्ट भेजता है और दूसरी ट्रेन एक निश्चित दूरी पर आकर रुक जाती है। फिलहाल ये सिस्टम लिमिटेड ट्रेन में ही इंस्टॅाल किया गया है।
हालांकि तमाम अत्याधुनिक सुविधाओं के बावजूद हमें अक्सर रेल दुर्घटना की खबर मिलती है। पिछले दिनों आंध्र प्रदेश में रेल दुर्घटना हो गई। अब पश्चिम बंगाल में भीषण दुर्घटना हुई है। ऐसे में भारतीय रेलवे को सिग्नल सिस्टम और ट्रैक रेनोवेशन आदि पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।


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