कार में पिकअप कम होने से नाराज ग्राहक ने कंपनी पर किया केस, 6 साल बाद मिला 20 हजार रुपये मुआवजा
कोर्ट ने कार के मालिक को खराब सर्विस देने के लिए मुआवजे के रूप में 20,000 रुपये देने के लिए कहा है। अदालत ने कंपनी को उनकी कार को मुफ्त में ठीक करने का भी आदेश दिया है।
यह मामला कर्नाटक के बेंगलुरु में सामने आया, जहां माइलासंद्रा रोड निवासी 35 वर्षीय दिनेश कुमार पीपी नाम के एक व्यक्ति ने 2015 में फौक्सवैगन वेंटो 1.5 डीजल हाईलाइन एम7 खरीदा था।

उन्होंने अपने कार हो रही दिक्कत के बारे में बताते हुए कहा कि वह ज्यादातर अपनी कार का इस्तेमाल करता था। लेकिन कार खरीदने के कुछ महीनों के बाद अक्टूबर 2016 में स्कोडा ऑटो फौक्सवैगन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से एक कॉल आया।
ये कॉल उत्सर्जन नियमों का पालन करने के लिए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को अपग्रेड करने के लिए था। जिसमें उन्हें स्कोडा ऑटो फौक्सवैगन के एक अधिकृत डीलर और मरम्मत केंद्र, सिंगसंद्रा, होसुर मेन रोड में एलीट मोटर्स प्राइवेट में अपना वेंटो को ठीक कराना था।

इसके बाद उन्हें 28 अक्टूबर, 2016 को डीलरशिप से कार वापस मिली। लेकिन कार वापस मिलने के बाद उन्होंने नोटिस किया कि कार बेहतर प्रदर्शन नहीं कर रही है और इसकी पिकअप काफी कम हो गई है। उन्होंने कहा कि इंजन से भी अजीब और तेज आवाज आ रही थी। जिसे ठीक कराने के लिए वे कार को वापस डीलर के पास ले गए।
हालांकि डीलरशिप पर कई बार जाने के बावजूद कोई भी तकनीशियन इस मुद्दे को हल करने में सक्षम नहीं था। ऐसे में मालिक ने मदद के लिए सीधे स्कोडा ऑटो फौक्सवैगन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर रुख किया लेकिन उनके अनुरोधों को नजरअंदाज कर दिया गया।

जिसके बाद उन्होंने परेशान होकर 6 दिसंबर, 2016 को निर्माता और डीलरशिप के खिलाफ एक औपचारिक शिकायत दर्ज की। हालांकि उन्हें अभी भी दोनों से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद कुमार ने फरवरी 2017 में बेंगलुरु तीसरे अतिरिक्त शहरी उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के साथ खराब सेवा के लिए वाहन निर्माता के खिलाफ शिकायत दर्ज की।
इसके बाद कंपनी के वकीलों ने आखिरकार जवाब दिया और कहा कि शिकायत झूठी और दुर्भावनापूर्ण है और यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध ऑटो निर्माता को परेशान करने के उद्देश्य से की गई है। कुमार ने अपने वकील के माध्यम से भी अपनी दलील पेश की। वकीलों ने कहा कि हालांकि कुमार के ऑटोमोबाइल की कई बार सर्विसिंग और मरम्मत की गई थी, उनका यह दावा कि उत्सर्जन से संबंधित सॉफ़्टवेयर या हार्डवेयर अपग्रेड ने पिकअप पर नकारात्मक प्रभाव डाला था और इंजन ज्यादा शोर कर रहा है।
दोनों पक्षों की ओर से करीब छह साल की सुनवाई के बाद आखिरकार 20 जनवरी 2023 को उपभोक्ता अदालत के जजों ने अपना फैसला सुनाया। अदालत के आदेश में कहा गया है कि हालांकि रिपेयर स्टेशन पर बार-बार सेवाएं ग्राहक के ऑटोमोबाइल को ठीक करने में विफल रहीं, उन्होंने यह भी देखा कि कुमार ने अपने दावे का समर्थन करने के लिए एक विशेषज्ञ रिपोर्ट जैसे पर्याप्त सबूत उपलब्ध नहीं कराए थे।
जजों ने कहा कि ग्राहक को डीलरशिप पर अपर्याप्तता थी। अंत में, अदालत ने फैसला किया कि स्कोडा ऑटो फौक्सवैगन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और बेंगलुरु में उसके सेवा केंद्र को मुफ्त में आवश्यक मरम्मत करनी चाहिए।
कोर्ट ने उन्हें इतने साल में हुई असुविधा के लिए मुआवजे के रूप में 10,000 साथ ही अपनी अदालती लागत को कवर करने के लिए 10,000 रुपये एक्स्ट्रा देने की बात कही। अदालत के निर्देश के अनुसार पैसे का भुगतान आदेश के 30 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए, अन्यथा विरोधी पक्षों पर जुर्माना बढ़ जाएगा।


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