वाहन स्क्रेपिंग कंपनियों को रखना होगा डिजिटल रिकॉर्ड, करनी होगी वाहन एनओसी की जांच
केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने वाहन स्क्रैपिंग नीति के संबंध में एक नई सूचना जारी की है। मंत्रालय ने इस सूचना में कहा है कि वाहन स्क्रैपिंग प्लांट को खोलने के लिए आवेदन देने से लेकर प्लांट में स्क्रैप होने वाले सभी वाहनों का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि स्क्रैपिंग प्लांट को स्क्रैप के लिए आने वाले वाहन हर वाहन के नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) की जांच करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा की वाहन पर स्थानीय आरटीओ के तरफ से भुगतान का बकाया या प्रतिबंध न हो।

मंत्रालय ने कहा कि अगर वाहन पर किसी भी तरह की आपत्ति पाई जाती है तो उसे स्क्रैपिंग के लिए अनुमति नहीं दी जाएगी। मंत्रालय ने यह भी कहा कि स्क्रैपिंग प्लांट ऑपरेटर को हर वाहन का रिकॉर्ड मंत्रालय द्वारा दिए गए निर्देश के अनुसार दर्ज करना होगा। बता दें कि वाहन स्क्रैपिंग की प्रक्रिया का डिजिटलीकरण पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।

मंत्रालय ने यह भी कहा है कि वाहन मालिक को स्क्रैपिंग और ओनरशिप ट्रांसफर सर्टिफिकेट भी डिजिटल फॉर्मेट में जारी किया जाएगा। इस डिजिटल सर्टिफिकेट की मदद से वाहन मालिक नए वाहन की खरीद पर सरकार द्वारा निर्धारित प्रोत्साहन और लाभ का फायदा उठा सकता है। इस सर्टिफिकेट की वैधता जारी होने की तिथि से दो साल बाद तक रहेगी।

बता दें कि केंद्र सरकार ने पिछले साल अगस्त में वाहन स्क्रैपिंग नीति (Vehicle Scrapping Policy) की घोषणा की थी। देश में प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को व्यवस्थित ढंग से कबाड़ करने के लिए वाहन स्क्रैपिंग नीति लाई गई है। यह एक महत्वपूर्ण नीति है क्योंकि पुराने वाहन फिट वाहनों की तुलना में 10-12 गुना अधिक पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं।

मौजूदा समय में, देश में लगभग 51 लाख ऐसे हल्के मोटर वाहन हैं जो 20 साल से ज्यादा पुराने हैं और 34 लाख हल्के मोटर वाहन हैं जो 15 साल से ज्यादा पुराने हैं। इसके अलावा, लगभग 17 लाख मध्यम और भारी वाणिज्यिक वाहन है जो 15 वर्ष से अधिक पुराने हैं और बिना वैध फिटनेस प्रमाण पत्र के चलाये जा रहे हैं।

बता दें कि 1 अप्रैल 2022 से केंद्र सरकार 15 साल से ज्यादा पुराने निजी और वाणिज्यिक वाहनों पर री-रजिस्ट्रेशन के शुल्क को बढ़ाने जा रही है। अब 15 साल से जयदा पुराने वाहन के री-रजिस्ट्रेशन के लिए आठ गुना अधिक शुल्क का भुगतान करना होगा। हालांकि, इस नीति का दिल्ली के वाहन मालकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दिल्ली एनसीआर में पहले से ही 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से जयदा पुराने पेट्रोल वाहनों को चलाने पर रोक है।

नए नियमों के अनुसार, 15 साल से ज्यादा पुराने दोपहिया वाहन का पंजीकरण शुल्क 300 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये कर दिया गया है। वहीं 15 साल से ज्यादा पुरानी कार के लिए अब 5,000 रुपये का रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल शुल्क देना होगा। इसी तरह 15 साल से अधिक पुराने सार्वजनिक और वाणिज्यिक वाहनों, जैसे बस या ट्रक पंजीकरण नवीनीकरण शुल्क 10,000 रुपये से लेकर 12,500 रुपये के बीच तय किया गया है।

वहीं आयातित (इम्पोर्टेड) बाइक और कारों के लिए अब री-रजिस्ट्रेशन शुल्क अधिक महंगा होगा। ऐसे दोपहिया वाहनों के लिए 10,000 रुपये और चारपहिया वाहनों के 40,000 का नवीनीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है।


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