इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल में यूपी है टाॅप, दिल्ली और कर्नाटक को भी छोड़ा पीछे
केंद्र सरकार ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सड़कों पर 9.66 लाख इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चल रहे हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक और बिहार इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करने वाले राज्यों में सबसे आगे हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 31 जनवरी, 2022 तक भारत में कुल 9,66,363 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हैं।

केंद्र सरकार के ई-वाहन पोर्टल (e-vahan portal) के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 2,76,217, दिल्ली में 1,32,302, कर्नाटक में 82,045, बिहार में 64,241, महाराष्ट्र में 53,159, राजस्थान में 47,480, तमिलनाडु में 45,368, असम में 43,707 और पश्चिम बंगाल में 43,432 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हैं। लोकसभा में पेश किए गए हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि गुजरात 31 जनवरी, 2022 तक 17,593 इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ सूची में 12वें स्थान पर है।

ई-वाहनों पर जीएसटी हुई कम
इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर जीएसटी दर को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जर या चार्जिंग स्टेशनों पर 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। ऑटोमोबाइल और ऑटो घटकों के लिए घोषित 25,938 करोड़ रुपये के प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना में इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह योजना पांच साल के लिए लागू की गई है।

देश में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए, केंद्र सरकार ने 2015 में पैन-इंडिया आधार पर भारत में फास्टर मॉडुलेशन ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (FAME) योजना की शुरूआत की थी। वर्तमान में, FAME योजना के दूसरे चरण को 1 अप्रैल, 2019 से पांच साल की अवधि के लिए लागू किया गया है, जिसमें कुल बजटीय सहायता 10,000 करोड़ रुपये है।

ई-वाहनों की कीमत होगी कम
मई 2021 में केंद्र सरकार ने देश में बैटरी की कीमतों को कम करने के लिए देश में उन्नत रसायन विज्ञान सेल के निर्माण के लिए पीएलआई योजना को मंजूरी दी, जिसके परिणामस्वरूप इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत में कमी आएगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने घोषणा की है कि बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों को हरी लाइसेंस प्लेट दी जाएगी, साथ ही उन्हें परमिट आवश्यकताओं से भी छूट दी जाएगी।

मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, MoRTH ने राज्यों को इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स माफ करने की सलाह देते हुए एक अधिसूचना जारी की, जो बदले में EV की प्रारंभिक लागत को कम करने में मदद करेगी।

देश में बढ़ेगी इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग
1 फरवरी को पेश किए गए आम बजट में केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं। हालांकि, बजट में इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों को कम या ज्यादा करने की घोषणा तो नहीं की गई है, लेकिन केंद्र सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी स्वैपिंग नीति लो लागू करेगी, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन को बार-बार चार्ज किये बगैर लंबा सफर करना आसान हो जाएगा।

इसके अलावा बजट में सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की नीति तैयार की गई है। इस नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी बनाने के लिए प्राइवेट क्षेत्र को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिए स्पेशल मोबिलिटी जोन डेवलप किए जाएंगे और सेमीकंडक्टर के प्रोडक्शन के लिए इंडस्ट्री डेवलप की जाएगी।

भारत सरकार जल्द ही इलेक्ट्रोलाइजर बनाने के लिए उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन की घोषणा करेगी ताकि स्थानीय स्तर पर ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जा सके। विद्युत मंत्रालय के साथ नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने राष्ट्रीय हाइड्रोजन नीति तैयार की है जिसे फरवरी के पहले सप्ताह में पेश किया जा सकता है। इस नीति के तहत हाइड्रोजन का उत्पादन करने वाले उपक्रमों को प्रोत्साहन के तौर पर मुफ्त बिजली देने की नीति तैयार की जा सकती है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2021 में आयोजित ग्लासगो जलवायु शिखर सम्मेलन में घोषणा की थी कि भारत 2030 तक कार्बन उत्सर्जन में 1 बिलियन टन की कमी करेगा और अपने 50 प्रतिशत ऊर्जा की जरूरत हो अक्षय ऊर्जा श्रोत से पूरा करेगा।


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