UP Police Fined Govt. Official: सरकारी अधिकारी ने गाड़ी पर लिखवाया था जाति का नाम, कटा चालान
कुछ दिन पहले ही उत्तर प्रदेश के एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर मुकेश चंद्र ने प्रदेश में वाहनों पर जाती सूचक स्टीकर लगवाने वालों पर करवाई करते हुए वाहनों पर चालान किया था। इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस अब वाहन पर गैरकानूनी रूप से राजनीतिक पार्टी और पुलिस का स्टीकर लगाकर घूमने वालों की धर-पकड़ कर रही है।

अब यूपी पुलिस ने एक सरकारी अधिकारी के वाहन पर जुर्माना किया है। पुलिस ने बताया कि या कार महराजगंज आयुक्त के ऑफिस के बहार खड़ी थी और कार की पिछली विंडस्क्रीन पर जातिसूचक शब्द लिखा था। पुलिस ने यह देखते ही गाड़ी का चालान काट दिया। पुलिस के ऐसा करते ही आयुक्त कार्यालय के अंदर हड़कंप मच गया।

आनन-फानन में कई लोगों ने अपनी गाड़ी से स्टीकर हटाना शुरू कर दिया जभी कई अपनी गाड़ी लेकर आयुक्त ऑफिस के चुपचाप निकल लिए। जांच में सरकारी अधिकारी ने बताया कि यह गाड़ी उसकी नहीं बल्कि उसके किसी रिश्तेदार की है। उसने बताया कि यह स्टीकर उसने अपनी जाती के अन्य लोगों को लोगों को देखते हुए लगाया है।

पुलिस से बात करते हुए उसने बताया कि जातिसूचक स्टीकर लगाने से फाइन के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं थी। उसने बताया कि अगर उसे पता होता की यह गैरकानूनी है तो उसने खुद ही यह स्टीकर हटा दिया होता।

हालांकि, पुलिस ने कानून का पालन करते हुए अधिकारी पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया। बता दें कि मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत वाहन में कहीं भी जातिसूचक शब्द लिखवाना गैरकानूनी है। अधिनियम के अनुसार, वाहन पर जातिसूचक शब्द लिखवाना समाज में जातिगत भेद-भाव को बढ़ावा देता है। ऐसे जातिगत प्रदर्शन से समाज में सामाजिक ताने-बाने को खतरा है।

एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में पिछले एक दशक से वाहन में जाती सूचक स्टीकर लगवाने का चलन बढ़ा है। मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार वाहन के नंबर प्लेट पर केवल रजिस्ट्रेशन नंबर लिखवाया जा सकता है। इसके अलावा वाहन के विंडस्क्रीन पर किसी भी तरह का पोस्टर या स्टीकर लगाना भी वर्जित है।

अभी कुछ दिनों पहले ही झारखण्ड हाई कोर्ट ने राज्य ट्रांसपोर्ट विभाग को वाहनों के नंबर प्लेट पर नाम लिखवाने को लेकर सवाल किया है। न्यायालय ने राज्य ट्रांसपोर्ट विभाग से ऐसे वाहनों के नंबर प्लेट की जांच कराने और नाम हटवाने के लिए एक अभियान चलाने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने बताया कि नंबर प्लेट पर नाम का इस्तेमाल केवल संवैधानिक पदों पर बैठे कर्मचारी अपने आधिकारिक वाहन पर कर सकते हैं। इसके अलावा अन्य अधिकारियों के वाहन में या प्राइवेट वाहन में नाम लिखवाने की अनुमति नहीं है।

मामले पर सुनवाई करते हुए दो जजों की बेंच ने कहा कि पंचायत मुखिया से लेकर पंचायत सेवक, प्राइवेट कंपनियों के सचिव, एनजीओ के अधिकारी और राजनितनिक पार्टियों से संबंध रखने वाले लोग धड़ल्ले से अपना नाम वाहनों पर लिखवाते हैं। बेंच ने बताया कि हाई कोर्ट जजों को भी अपने प्राइवेट वाहन में नाम लिखवाने की अनुमति नहीं है।

कोर्ट ने निचली अदालतों में काम करने वाले अधिकारियों को अपने प्राइवेट वाहनों से नाम हटवाने का भी आदेश दिया है। बेंच ने झारखंड सरकार को ट्रैफिक नियम का सख्ती से पालन करवाने का आदेश भी दिया है।

बता दें कि मोटर वाहन अधिनियम 1988 के अनुसार वाहन के नंबर प्लेट या कहीं और नाम लिखवाना गैरकानूनी है। मोटर वाहन कानून में केवल संवैधानिक पदों पर नियुक्त अधिकारियों को आधिकारिक वाहन के नंबर प्लेट पर नाम लिखवाने की अनुमति दी गई है।


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