टायर फटना ईश्वरीय कार्य नहीं, मानवीय लापरवाही; अब इंश्योरेंस कंपनी को चुकाने होंगे 1.25 करोड़ रुपये
भारत में कार दुर्घटना बेहद आम बात बन चुकी है लेकिन कई बार इससे लोगों की जान भी चली जाती है। आमतौर पर कार से चलते समय कोई दुर्घटना होती है तो वह मानवीय भूल मानी जाती है लेकिन इस केस में यह बिल्कुल ही अलग मामला था।
दरअसल साल 2010 में कार के पिछले टायर के फटने की घटना की वजह से एक मौत के मामलें में बंबई हाई कोर्ट ने इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया है। इंश्योरेंस कंपनी का कहना था कि यह एक ईश्वरीय कार्य है लेकिन इसे खारिज कर दिया गया है।

'न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड' ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्राइब्यूनल के 2016 के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी लेकिन न्यायमूर्ति एस जी डिगे की पीठ ने कहा कि टायर फटना ईश्वरीय कार्य नहीं है बल्कि एक मानवीय लापरवाही है।
मकरंद पटवर्धन नाम व्यक्ति 2010 में कार में पुणे से मुंबई जा रहे थे और पिछला टायर फटने की वजह से कार खाई में जा गिरी, इस हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गयी थी। वह अपने परिवार में अकेले कमाने वाले थे।

अब उनके परिवार को 1।25 करोड़ रुपये मुवाअजा दिया जाएगा। इंश्योरेंस कंपनी का मानना था कि मुआवजे की यह रकम बहुत अधिक है और ऐसे में कंपनी ने इसके खिलाफ याचिका दायर की थी। हालांकि अब इसे रद्द कर दिया गया है।
एसजी डिगे ने यह कहते हुए असहमति जताई कि टायर फटना तेज गति से वाहन चलाने या कम या अधिक फुलाए गए टायरों के कारण हो सकता है और यात्रा से पहले टायर की स्थिति की जांच करना वाहन के मालिक या चालक का कर्तव्य है।

उन्होंने आगे कहा कि ईश्वरीय कार्य उसे कहा जाता है जहाँ कोई भी इंसान किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं है। टायर फटने की घटना को ईश्वरीय कार्य कह कर मुआवजे को नकारा नहीं जा सकता है।
अगर आप भी अपने टायर की देखभाल करना चाहते हैं तो आपको भी कोई जरुरी बातों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे टायर में हवा का प्रेशर, कम या अधिक होने पर इंजन पर पड़ता है।

वहीं गर्मियों में कार में हवा थोड़ी कम रखनी चाहिए ताकि टायर को पूरी तरह से फैलने की जगह मिल सके। अधिक हवा होने पर तेज गति से चलने पर टायर फट ही सकता है और बड़े हादसे का रूप ले सकता है।
सबसे बड़ी बात है कि जब भी आप घर से निकल रहे हैं और लंबा सफर करने वाले हैं तो अपने टायर व उसके एयर प्रेशर पर एक बार जरुर नहीं डाल लें, नहीं तो आपको बाद में पछताना पड़ सकता है।


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