कोरोना लॉकडाउन के दौरान ऐसे फंसे, 20 दिन के लिए कार को ही बनाया घर
देश में कोरोना लॉकडाउन की वजह से कई लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जो जहां फंस गये है उन्हें घर जाने की अनुमति भी नहीं दी जा रही है तथा उसी जगह पर रुकना पड़ रहा है।

ऐसे ही हालत में कर्नाटक के दो व्यक्ति गुजरात में अपनी कार निसान माइक्रा के साथ फंस गये है, वह पिछले 20 दिन से वहां फंसे हुए है। यह दो व्यक्ति दक्षिण कन्नडा जिले के आशिक हुसैन व मोहम्मद थाकिन मारिल है, यह दोनों ही व्यापारी है।

वह दोनों ही व्यापारी लॉकडाउन की घोषणा से पहले एक मीटिंग के लिए गुजरात गए थे, जब वह लॉकडाउन की घोषणा के बाद वापस आना चाह रहे थे तो उन्हें वलसाड के उम्बरगांव, गुजरात में एक चेक पॉइंट में रोक लिया गया।

उन्होंने पुलिस वालों को भी अपने स्थान व परिवार की जानकारी दी लेकिन इसके बावजूद भी उन्हें नहीं जाने दिया गया। उसके बाद से वह अपनी निसान माइक्रा कार को अन्य फंसे ट्रक आदि वाहन के साथ ही पार्क कर दिया है तथा उसी को पिछले 20 दिन से अपना घर बना लिया है।

वह अपने कार में ही सोते है तथा उसी में दिन भर गुजारते है, पास के ही होटल संचालक उन्हें वाशरूम व टॉयलेट उपयोग करने देते है। आस-पास के स्थानीय लोग व सामाजिक कार्यकर्ता उन्हें खाना व दवाई वगैरह देते है।

उनके पास सोने के लिए बिस्तर तक नहीं है। रशीद, विटला नाम के एक शख्स इनकी मदद कर रहे है, उन्होंने इनका यह मामला कलेक्टर के संज्ञान में लाया है। साथ ही इनके परिवार वाले भी अपने यहां की पुलिस पर इन्हें घर जाने देने के लिए प्रेशर दे रहे है।

दक्षिण कन्नडा जिले के डिप्टी कमिश्नर ने भी वलसाड के कलेक्टर को पत्र लिखकर इनके रहने व खाने की व्यवस्था करने की बात कही है। हालांकि अभी तक उन्हें स्थानीय प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली है।

बतातें चले कि इसान माइक्रा एक छोटी से हैचबैक है जिसमें दो लोगों का मुश्किल से आना हो पाता है, ऐसे में उसमें दिन रात गुजारना एक दूभर काम है। हम उम्मीद करते है कि उन्हें जल्द से जल्द ही राहत पहुंचाई जाएगी।

इस तरह के फंसे होने की कई कहानियां सामने आ रही है हाल ही में एक ऐसे ही मामले में तेलंगाना की एक औरत ने 1400 किलोमीटर का तीन दिन का सफर करके आंध्र प्रदेश में फंसे अपने बेटे को वापस लाया था।


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