टोयोटा: भूकंप से प्रेरित होकर बनी थी ये कार कंपनी, दिवालिया होने से भी बची, आज है भारतीयों की स्टेटस सिंबल
टोयोटा की फाॅर्च्यूनर और लैंड क्रूजर जैसी कारों को भारत में स्टेटस सिंबल से जोड़ कर देखा जाता है। रुतबे कि बात ही तो टोयोटा की ही कारों का नाम हमेशा पहले आता है। आज टोयोटा दुनिया में सबसे ज्यादा कार बनाने वाली कंपनी है। कंपनी ने 2022 में दुनियाभर में 21 लाख से ज्यादा कारों की बिक्री की है। वहीं कारों के निर्माण में यह फॉक्सवैगन और जनरल मोटर्स जैसी बड़ी कंपनियों को भी पीछे छोड़ चुकी है। लेकिन क्या आपको पता है टोयोटा की शुरुआत की कहानी बेहद अलग है। आइये जानते हैं वाहन जगत में टोयोटा ने कैसे रखा कदम...

भूकंप से आया कार कंपनी का आईडिया
टोयोटा के बारे में जानने वाले कुछ जानकर बताते हैं कि इस कंपनी को खड़ा करने का विचार अन्य कंपनियों से बेहद अलग था। दरअसल, टोयोटा कंपनी को शुरू करने का विचार जापान में आये एक भूकंप की एक घटना के बाद आया। 1923 में जापान में कई बार भूकंप की घटनाएं हुईं। उस समय लोगों को प्रभावित इलाकों से निकालने के लिए कार, ट्रेलर और अन्य वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इस घटना से प्रेरित होकर टोयोटा के फाउंडर कीछिरो टोयोदा ने 1932 में एक प्रोटोटाइप कार मॉडल AA 1932 बनाया, जो बाजार में काफी सफल हुई। इसके बाद 1936 में उन्होंने टोयोटा की एक कार कंपनी के तौर पर नींव रखी।

बेहतर क्वालिटी पहली प्राथमिकता
जब क्वालिटी की बात होती है तो टोयोटा की कारों का नाम पहले आता है। यह इसलिए क्योंकि शुरू से ही टोयोटा का सिद्धांत लोगों को बेहतर क्वालिटी की सुरक्षित कारें प्रदान करना है। टोयोटा अपनी कारों के प्रोडक्शन प्रोसेस और क्वालिटी पर विशेष ध्यान देती है, इसलिए सेफ्टी के लिए टोयोटा की कारें दुनियाभर में मशहूर हैं।

1951 में आई पहली लैंड क्रूजर
टोयोटा लैंड क्रूजर एसयूवी को कौन नहीं जनता है। हालांकि, जब यह पहली बार लॉन्च हुई थी तो आज के मॉडल से काफी अलग थी। लैंड क्रूजर को पहली बार 1951 में लॉन्च किया गया था और इसे दुनियाभर में लोगों ने खूब पसंद किया। उस समय टोयोटा इसकी केवल 500 यूनिट्स हर महीने बना रही थी। टोयोटा का मानना था कि प्रोडक्शन को बढ़ाने से ज्यादा महत्वपूर्ण क्वालिटी पर ध्यान देना है। समय के साथ टोयोटा जापान में एक बड़े कार ब्रांड के रूप में उभरने लगी और प्रोडक्शन भी बढ़ने लगा।

दूसरे वर्ल्ड वॉर में हालत थी पस्त
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान दुनियाभर का बाजार अस्त-व्यस्त हो गया था जिस वजह से टोयोटा को की भी बिक्री और प्रोडक्शन पर बूरा प्रभाव पड़ा था। हालांकि दूसरे विश्व युद्ध में टोयोटा को सबसे बड़ा नुकसान जापान पर अमेरिका द्वारा परमाणु हमले के बाद हुआ। इस हमले में टोयोटा इस हद तक प्रभावित हुई कि कंपनी को दिवालिया होने की अर्जी तक देनी पड़ी।

हालांकि, कंपनी ने किसी तरह हालात को संभाला और उत्पादन को बंद होने से रोका। टोयोटा ने अपना खर्च कम करने के लिए कर्मचारियों की छंटनी भी की जिससे उसे लोगों के गुस्से का भी सामना करना पड़ा। इसी बीच दुनिया भर में ट्रक्स की डिमांड बढ़ने से कंपनी ने अमेरिका समेत कई देशों में माल ढोने वाले और मिलिट्री ट्रक्स का निर्यात करना शुरू कर दिया। इसी दौरान कंपनी ने कई देशों में शोरूम और आउटलेट भी खोले।

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी बनी
आज टोयोटा किफायती कारों से लेकर करोड़ों की कीमत वाली लग्जरी कारें भी बनाती है। कंपनी ने 1989 में लग्जरी कार ब्रांड लेक्सस को लॉन्च किया। 2000 में टोयोटा ने कारोबार को बढ़ाने के लिए कई कंपनियों से साझेदारी की। इसके बाद कंपनी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज टोयोटा दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कार निर्माता है। मार्केट कैप के मामले में टेस्ला के बाद टोयोटा दूसरी सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी है।


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