कार से लद्दाख जा रहे हैं तो न करें ये गलती, नहीं तो भरना पड़ेगा 50,000 रुपये का चालान
भारत के पर्यटन स्थलों में अक्सर लोग नियमों को तोड़ते हुए नजर आ जाते हैं। लोग कई बार ऐसी जगहों में चले जाते हैं जहां आने की सख्त मनाही होती है। सरकार के तरफ से ऐसी जगहों को पर्यावरण संरक्षण या फिर किसी और कारण से संरक्षित किया जाता है। हाल ही लदाख के नुब्रा घाटी के हुंडर स्थित रेतीले इलाके में कुछ लोगों को कार चलाते हुए लेह पुलिस ने पकड़कर उनपर भारी जुर्माना लगाया है।

कटा 50,000 रुपये का चालान
लेह पुलिस ने अपने फेसबुक हैंडल पर एक टोयोटा फाॅर्च्यूनर की तस्वीर साझा की है जिसमें दिल्ली का नंबर प्लेट लगा है। पुलिस के मुताबिक, दोनों कार सवार राजस्थान के हैं और अपनी कार से दिल्ली से लेह घूमने आए थे। पुलिस ने कार चालक पर प्रतिबंधित जगह में ड्राइविंग करने के आरोप में 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।

आपको बता दें कि लेह-लदाख के कई इलाकों में पर्यटकों का जाना मना है। इसमें लदाख के कई रेतीले इलाके भी शामिल हैं। स्थानीय प्रसाशन ने इन इलाकों के प्राकृतिक सौंदर्य को खराब होने से बचाने के लिए पर्यटकों को प्रतिबंधित किया है। पुलिस का आरोप है कि कार सवारों ने इस प्रतिबंध का उल्लंघन किया जिसके चलते उनपर जुर्माना लगाया गया।

सोशल मीडिया पर इस पोस्ट के वायरल होने के बाद कई यूजर्स इसपर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई लोगों ने इस कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबंधित किये गए जगहों पर जाना दंडनीय अपराध होने चाहिए। वहीं, कुछ लोगों ने लद्दाख जाने वाले पर्यटकों को वहां के जरूरी नियम व तौर-तरीकों को जानने की भी बात कही।

इससे पहले, लेह के पैंगोंग झील के किनारे ऑडी कार चलाते हुए तीन लोगों का वीडियो इंटरनेट पर खूब वायरल हो रहा था। उन्होंने झील के किनारे एक टेबल और शराब की बोतलें भी रखीं थीं। लोगों का कहना था कि इस तरह झील में कार चलाने से वहां के पक्षियों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। वीडियो इंटरनेट पर वायरल होने के बाद कुछ लोग लेह पुलिस से उनपर कड़ी कार्रवाई करने की मांग कर रहे थे।

भारत में सड़क हादसे सबसे ज्यादा
आपको बता दें कि यातायात नियनों के उल्लंघन से भारत में सबसे ज्यादा सड़क हादसे और मौतें होती हैं। परिवहन मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में हर साल लगभग 4.50 लाख सड़क हादसे होते हैं, जिनमें लगभग 1.50 लाख लोगों की मौतें होती हैं। यह आंकड़ा दुनिया भर में किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे अधिक है। भारत में अपंगता के लिए सड़क दुर्घटनाओं को मुख्य कारण बताया गया है।

परिवहन मंत्रालय के अनुसार, साल 2020 के दौरान सड़क हादसों में कुल 1,20,806 लोगों की मौत हुई है। इन हादसों के अधिकतर शिकार उत्पादक वर्ग के युवा थे। इन सड़क हादसों में मरने वालों में 18-45 आयु वर्ग के लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है। इस आयु वर्ग के लगभग 70 प्रतिशत लोगों ने 2020 के सड़क हादसों में अपनी जान गंवाई।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सड़क हादसों में शामिल वाहन श्रेणियों में सबसे ज्यादा संख्या दोपहिया वाहनों की थी। जबकि कार, जीप और टैक्सी जैसे हल्के वाहन एक साथ दूसरे स्थान पर हैं। कुल मृत्यु में दोपहिया सवारों की हिस्सेदारी 2020 के दौरान सबसे ज्यादा (43.5%) रही। सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए 17.8 प्रतिशत लोग पैदल चलने वाले थे।

2020 के सड़क हादसों के रिपोर्ट में ओवरस्पीडिंग को दुर्घटनाओं का मुख्य कारण बताया गया। अधिक स्पीड में गाड़ी चलाने से 69.3% दुर्घटनाएं हुईं, वहीं सड़क के गलत साइड में ड्राइविंग करने के मामलों में 5.6% दुर्घटनाएं हुईं।


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