Parking Lot With 18 SUVs Seized By Cops: कार चोर गिरोह का हुआ पर्दाफाश, मिली 3 करोड़ की कारें
चंडीगढ़ पुलिस ने कार चोरी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस रैकेट को चलने वाले दो लोगों के पास से 18 कारों को जब्त किया है जिसकी कुल कीमत 3 करोड़ के लगभग बताई जा रही है। चोरों का यह गिरोह चुराई गई कारों को देश के देश के अलग-अलग शहरों में बेचता था।

चंडीगढ़ पुलिस ने लुक दिनों पहले संदेह के आधार पर एक हुंडई क्रेटा के साथ 39 वर्षीय रमेश को पकड़ा और कार को जब्त कर उसकी जांची की, पता चला की कार का इंजन और चेसीस नंबर से छेड़छाड़ की गई है। मामले की तफ्तीश के बाद सामने आया कि रमेश कार चोरी का रैकेट चलता है।

इसके बाद रमेश ने अपने एक और साथी 37 वर्षीय अमित का नाम बताया। पुलिस ने सूचना के आधार पर अमित को भी गिरफ्तार कर लिया। जाँच में पता चला कि दोनों उत्तर प्रदेश के मेरठ में चोरी की गई कारों को बेचने का धंधा चलाते हैं।

दोनों गाड़ी के रजिस्ट्रेशन और चेसीस नंबर को बदल कर हरियाणा आरटीओ से नया रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट बनाया करते थे। इसके बाद इन कारों को अच्छे कीमत पर बेचकर मुनाफा कमाते थे।

पुलिस ने इन दोनों के पास से 18 कारों को बरामद किया है जिसमे 8 टोयोटा फॉरच्यूनर, 3 टोयोटा इनोवा, 5 हुंडई क्रेटा और 2 मारुति विटारा ब्रेजा कारें बरामद की गई हैं। पुलिस ने इन कारों को खरीदने वालों के घर भी छापेमारी कर कारों को बरामद किया है।

गाड़ी के साथ छेड़छाड़ कर उसकी पहचान को बदलना चोरों का आम तरीका है। इससे पुलिस द्वारा कार को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। कार चोरी के कई गिरोह चोरी की गई कारों के पुर्जों को अलग कर बेच देते हैं।

कार को चोरी से बचाने के लिए आज कई नई तरह के तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। आज कल कारों में इमोबिलाइजर लगा होता है जिससे कार को डुप्लीकेट चाबी से खोलना नामुमकिन होता है। कार में जीपीएस ट्रैकर भी लगाया जा सकता है जिससे कार चोरी होने पर उसकी लोकेशन की जानकारी कार को ट्रैक करने में मदद करती है।


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