कार में आग पकड़ने के मुख्य 10 कारण
इस समय सड़क पर अचानक से चलती कार में आग लग जाना एक सामान्य सी बात होती जा रही है। शुरूआती दौर में ऐसा हासदा यदा कदा ही देखने को मिलता था लेकिन अब आये दिन आप कार को आग का गोला बनते देख सकते हैं।
ऐसे मामलों में सबसे ज्यादा किरकिरी टाटा की लखटकिया कार नैनो की हुई थी, जिसके बाबत कंपनी ने इस कार के प्लास्टिक मटैरियल में कुछ परिवर्तन किया था जिसके बाद इस कार में आग लगने के मामले आने बंद हो गयें थें। लेकिन क्या दूसरी कारें आग से महजफूज हैं?
आज हम आपको अपने इस लेख में कार में आग लगने कि उन 10 कारणों के बारें में बतायेंगे, जिन्हें जानना आपके लिये बेहद जरूरी है।

आगे नेक्स्ट स्लाइड पर क्लिक करें और जानें वो कौन सी 10 बातें हैं जिनकी वजह से सड़क पर चलती कार में अचानक आग लग जाती है।

डिजाइन में गलती:
हालांकि ये एक ऐसा कारण है कि आपका इन पर कोई बस नही होता है। कभी-कभी वाहन निर्माता अपने वाहनों को गलत तरीके से डिजाइन कर देते हैं जिनमें बहुत सी बातें शामिल होती हैं। जैसे कि आकार, कार में प्रयुक्त मटैरियल आदि। कई बार इस वजह से भी कार में आग लगने का खतरा बनता है।

मेंटेनेंस की कमी:
मेंटेनेंस की कमी एक मुख्य कारण है। जब आप अपनी कार को लंबे वक्त से सर्विस या फिर उसमें आने वाली छोटी खामियों को नजरअंदाज करते हैं। तो आगे चलकर एक भयानक अग्निकांड का रूप ले लेते हैं।

सड़क पर भिडंत:
ये एक सामान्य कारण है, जब भी कभी सड़क पर दो चलती कारें आपस में भिड़ती हैं तो उनमें आग लगने के चांसेज बढ़ जाते हैं। ऐसा इसलिये होता है कि, इस दौरान फ्युल टैंक में क्रैक पड़ने से या फिर दो मेटैल के आपसी टकराव से आग पकड़ लेता है।

बाजारू एक्सेसरीज:
बहुत से वाहन निर्माता बाजार से खरीदे गये एक्सेसरीज का प्रयोग करने के लिये मना करते हैं। ऐसा इसलिये नहीं कि आप उनके उत्पादों को न खरीदें बल्कि कई बार ऐसा होता है कि जब आप बाहर के एक्सेसरीज को अपनी कार में लगवाते हैं तो वो कंपनी फिटेड वायरिंग से छेड़-छाड़ करते हैं जो कभी-कभी कार में स्पार्किंग आदि का कारण बनती है, जिसके चलते आग लगने का खतरा बढ़ जाता है।

कैटेलेटिक कन्वर्टस का गरम होना:
कार में प्रयुक्त एक्जॉस्ट सिस्टम सबसे ज्यादा गर्मी को बर्दाश्त करता है। इस दौरान कई बार वो ओवरहीट हो जाती है, जिसके कारण इसके आस-पास के प्लास्टिक मटैरियल आदि पिघलने लगते हैं और देखते-देखते उनमें आग लग जाती है।

इंजन का गर्म होना:
कार चलाते समय इंजन का गर्म होना स्वाभाविक बात है। जब इंजन हद से ज्यादा गर्म हो जाता है तो फिर बोनट के भीतर किसी भी कमजोर पार्ट को वो आसानी से झुलसा सकता है। कई मामलों में इंजन के गर्म होने से ही आग लगने की पुष्टी की गई है।

फ्यूल का लिक होना:
जब कार लंबे समय तक चलती है तो इंजन ऑयल या फिर इंधन गर्म होने के कारण कार के बॉडी पार्टस से रिसने लगते हैं। इस दौरान जब वो कार के किसी ऐसे पार्ट पर पड़ते हैं जो गर्म हो तो वो आसानी से आग पकड़ लेते हैं।

इलेक्ट्रीक:
ये भी एक सामान्य लेकिन बहुत महत्वपूर्ण बिंदू है। जी हां, कई बार कार में गलत वायरिंग के चलते इलेक्ट्रिक स्पार्किंग होती है जिसके कारण कार में आग लग जाती है।

कार में धूम्रपान:
धूम्रपान करना न केवल आपके फेफडे को जलाता है बल्कि कई बार ये आपकी कार में भी आग लगाने का कारण बनता है। कई मामलों में देखा गया है कि कार के भीतर धूम्रपान के कारण आग लगी है।

कार में एलपीजी:
भारत में भारी मात्रा में लोग अपनी कारों को एलपीजी सिलेंडरों का प्रयोग करते हैं। ऐसे करके वो चार पैसे तो बचा लेते हैं लेकिन न जाने कितनी जिंदगियों को खतरे में डाल देते हैं।


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