Driverless कारों पर काम कर रही हैं भारत की ये तीन IITs, सफल हुई तो मिलेगी Traffic Jam से मुक्ति
भारत की मुंबई, कानपुर और खड़गपुर आईआईटीज ड्राइवरलेस कारों पर लगातार काम कर रही हैं।
इन दिनों भारत के तीन सबसे बड़े तकनीकी स्कूल्स के प्रतिभाशाली लोग भारत की सड़कों पर ड्राइवरलेस कारों को चलाने के सपने को साकार करने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि अगर यह मिशन सफल हो गया तो देश को जाम से हद तक मूक्ति मिल जाएगी।

खबरों के मुताबिक भारतीय तकनिकी संस्थान कानपुर, मुंबई और खडगपुर की टीमें ड्राइवरलेस सोल्यूशन पर लगातार काम कर रहे हैं। इस परियोजना को लेकर कुछ ऑटोमोटिव कम्पनियां भी दिलचस्पी दिखा रही हैं। हालांकि इनके नामों का अभी तक खुलासा नहीं किया गया है।

इस बारे में इकोनामिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट की मानें तो आईआईटी प्राइवेसी के कारण कम्पनियों के नाम का खुलासा नहीं कर रही हैं। जबकि परिसर सूत्रों का साफ कहना है कि कई प्रमुख ऑटो कम्पनियां तीनों आईआईटीज के साथ मिलकर काम कर रही है।

इस परियोजना को लेकर आईआईटी खडगपुर के देवाशीष चक्रवर्ती का कहना है कि हम इस प्रोजेक्ट को लेकर वैश्विक कम्पनियों के साथ मिलकर इससे संबंधित तकनिकी का परीक्षण कर रहे हैं और भारत के बाजार को देखते हुए हम यहां पर ड्राइवरलेस प्रौद्योगिक पर काम कर रहे हैं।

आपको बता दें कि भारत के अलावा गूगल, उबर और टेस्ला जैसी कई वैश्विक कम्पनियां इस सेल्फ कार के प्रोजेक्ट को लेकर अपनी टेस्टिंग शुरू कर दी है।

इधर गौरव पांडेय की मानें तो आईआईटी खडगपुर के स्टूडेंट वर्तमान में अपने कैम्पस में इसकी टेस्टिंग के स्कैच पर काम कर रहे हैं। वे इसे लेकर अपना प्लान बनाने में व्यस्त हैं। आपको बता दें कि आईआईटी कानपुर के इस प्रोजेक्ट में शामिल होने के लिए गौरव ने अमेरिका स्थित फोर्ड मोटर कंपनी में इसी योजना पर अनुसंधान करने की नौकरी को साल 2015 में छोड़ दिया था।

आईआईटी बॉम्बे के अंकित शर्मा का कहना है भारत एक जटिल मार्केट है और यहां पर पर्याप्त बुनियादी ढांचों और नागरिक भावनाओं का अभाव है। ऐसे में यह कार्य उनके लिए और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। अंकित इस ड्राइवरलेस प्रौद्योगिकी पर काम करने वाले छात्रों की टीम को लीड कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि हम भले विदेशों में जाकर इस प्रोजेक्ट को लेकर कार्य करें, लेकिन अगर हमें इसका समाधान ढ़ूढ़ना है तो हमें यह कार्य भारत में ही करने की आवश्यकता है।

आईआईटी बॉम्बे इसके लिए 3डी लेजर सेंसर से सड़कों को पढने का कार्य कर रही है।


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