उत्तर-कोरियाई तानाशाह, उसकी सीक्रेट ट्रेन और विदेशी यात्रा का राज़
उत्तर कोरिया का तानाशाह शासक किम जोंग-उन दुनिया का सबसे चर्चित तानाशाह है। कभी वह परमाणु हथियार बनाने के लिए चर्चा में रहता है तो कभी अमेरिका, जापान या दक्षिण कोरिया से विवाद के चलते।

किम जोंग-उन इस बार चर्चा में आया है अपनी चीन यात्रा को लेकर। किम के इस दौरे की चारों तरफ जितनी चर्चा है उतनी ही चर्चा उस ट्रेन को लेकर है, जिसमें सवार होकर वह प्योंगयोंग से बीजिंग गया है।

जिस ट्रेन में सवार होकर किम जोंग उन बीजिंग पहुंचा है वह कोई आम ट्रेन नहीं है। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक हरे रंग और पीले धारीयों और 21 बोगियों वाली यह ट्रेन पूरी तरह से बुलेटप्रूफ है।

इस ट्रेन को लेकर कई तरह की कहानियां हैं ,जैसे कोई कहता है कि इस ट्रेन को रूस के पूर्व राष्ट्रपति स्टालिन ने किम जोंग द्वितीय को गिफ्ट में दिय़ा था। जिसे बाद में मॉडिफाई किया गया। कोई कहता है कि इसे खास किम परिवार के लिए ही तैयार किया गया है और इसीलिए किम परिवार हमेशा इसी ट्रेन से अपनी यात्राएं करते आए हैं।

कई लोग कहते हैं कि किम परिवार को हवाई यात्रा करने में डर लगता था इसलिए ये अपनी सभी विदेशी यात्राएं ट्रेन में करना पसंद करते थे।

किम जोंग उन की इस विशेष ट्रेन को समय के साथ कई आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस किया गया है। इसमें हाईटेक कॉन्फ्रेंस रूम, बड़ा ऑडियंस चैंबर और आलीशान बेडरूम के साथ-साथ सभी सुख-सुविधा का पुरा ख्याल रका गया है।

ट्रेन के शीशे एैसे हैं कि बाहर से भीतर का कुछ भी दिखाई नहीं देता। इससे अंदर कौन मौजूद है या क्या कर रहा है कुछ भी जान पाना बहुत मुश्कील है और सफर बिल्कुल सीक्रेट रहता है, जो कि उत्तर कोरिया के तानाशाह के लिए बहुत जरुरी है।

इस ट्रेन को सैटेलाइट फोन कनेक्शन के साथ भी जोड़ा गया है और साथ ही इसमें टीवी, एयरकंडीशन इत्यादि लगाए गए हैं, ताकि इस नार्थ कोरियाई तानाशाह को अपने अधिकारियों से बात करने में भी कोई दिक्कत ना हो और मनोरंजन में भी कोई कमी ना हो।

रूस के एक अफसर ने मौजूदा तानाशाह किम जोंग-उन के पिता किम जोंग-इल के साथ 2011 में इस ट्रेन में सफर किया था। उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि ट्रेन में विशेष तौर पर लेडी कंडक्टर होती थी और खाने के लिए लगभग चार देशों के रशियन, चाइनीज, जैपनीज और फ्रेंच व्यंजन होते थे।

हालाकि रफ्तार के मामले में किम जोंग-उन की यह ट्रेन काफी पीछे है। यह अधिकतम रफ्तार सिर्फ 60 किलोमीटर प्रति घंटा से दौड़ती है। इस ट्रेन की धीमी रफ्तार का कारण है इसका पूरी तरह से बुलेटप्रूफ होना। पूरी तरह से बुलेटप्रूफ होने के कारण इसका वजन बहुत ज्यादा है और ज्यादा तेज नहीं दौड़ सकती है।

आपको बता दें कि प्योंगयोंग से बीजिंग पहुंची इसी खास ट्रेन से वर्ष 2011 में किम के पिता किम जोंग इल ने भी बीजिंग की यात्रा की थी। उनसे पहले किम इल संग जो कि मौजूदा तानाशाह किम जोंग इल के दादा थे, ने भी इसी खास ट्रेन से बीजिंग और रूस की यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने वहां पर रूसी राष्ट्रपति दमित्री मेडवेडेव से मुलाकात की थी।


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