कारें करेंगी शराबी चालकों की पहचान

भविष्य में आने वाली कारों में ऐसी टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जायेगा जिससे आसानी से ड्राइवरों की शराबी प्रकृति की पहचान की जा सके। मनुष्य की बहुमुल्य जिन्दगी बचाने के लिये इस पहलू पर रिर्सच किया जा रहा है। इस रिसर्च के क्रम में कार में एक ऐसा सेंसर रखा जायेगा जो चालक की खून में अल्कोहल की सीमा मापा सके। शोधकर्ताओं ने इस टेक्नोलॉजी का नाम ड्राइवर एल्कोहल डीटेक्सन सिस्टम फार सेफटी (डीएडीएसएस) रखा है।
यह टेक्नोलॉजी दो तरह से लागू हो सकेगी, पहला ड्राइवर की सांस विश्लेषण और दूसरा उसका स्किन टेस्ट जो कार के पहियों में लगे सेंसर और कार लॉक, दरवाजे और स्टीयरिंग में लगे सेंसर की मदद से संभव हो्रा। अगर कार चालक के खून में एल्कोहल की मात्रा 0.08 प्रतिशत है तो कार उसे ड्राइव करने की अनुमति देगी मगर एल्ाकोहल की मात्रा अगर इससे थोड़ी भी अधिक हुई तो कार खुद ब खुद स्टार्ट नहीं होगी। वर्तमान में उत्तरी अमेरिका, स्वीडन और न्यू मैक्सिको में इस तकनीक पर शोध जारी है। कार निर्माताओं के लिए यह तकनीक वैकल्पिक होगी।
शोधकर्ताओं का कहना है कि ड्राइवर एल्कोहल डीटेक्सन सिस्टम फार सेफटी पूर्व में आयी ब्रेथ एनालाइजर से बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि इस नई तकनीक में एल्कोहल का टेस्ट सेकेण्ड से भी कम समय में किया जायेगा। इस तकनीक का प्रयोग वर्ष 2008 से किया जा रहा है और अब ऐसी उम्मीद जाहिर की जा रही है कि आने वाले कुछ समय में इसे राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात सुरक्षा प्रशासन और यातायात सुरक्षा के लिए मोटर वाहन गठबंधन से अनुदान सहायता प्राप्त होने पर इसे प्रयोग में लाया जायेगा। शोधकर्ताओ का कहना है कि इस प्रकिया को पूरी तरह से प्रारूप में आने में लगभग दो साल और लगेगें।


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