टेस्ला कार ग्राहकों ने की भूख हड़ताल, इन खराबियों के वजह से खरीदार हैं परेशान
कार के खराब होने पर हमें काफी निराशा होती है। कार के खराब होने का यह दुख और भी बढ़ जाता है जब कार नई हो आपने उसे कुछ दिन ही चलाया हो। कार के खराब होने पर कार ग्राहक कंपनी के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए कई तरीके अपनाते हैं ताकि उनकी आवाज कंपनी तक पहुंचे।
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हाल ही में नॉर्वे के कुछ टेस्ला कार ग्राहकों ने अपनी नाराजगी दिखाने के लिए कुछ ऐसा ही तरीके अपनाया।

रिपोर्ट के मुताबिक, टेस्ला कार के नाराज ग्राहकों ने कंपनी से अपनी मांगों को लेकर 24 घंटे का सामूहिक रूप से भूख हड़ताल किया। टेस्ला कार मालिकों का कहना था कि ऐसा कर वे अपनी आवाज टेस्ला के मालिक एलन मस्क तक पहुंचना चाहते हैं। ग्राहकों के इस समूह ने अपनी टेस्ला कार में आ रही कई समस्याओं को जाहिर किया।

ग्राहकों के बताया कि उनकी कारों में कई तरह की खराबी सामने आ रही हैं। ज्यादातर समस्याएं कार की क्वालिटी, बैटरी और रेंज को लेकर थी। ग्राहकों ने बताया कि उनकी नई टेस्ला कार की सीट में कुछ दिनों के इस्तेमाल से बुलबुले उठ गए हैं। इसके अलावा कार के इंफोटेनमेंट स्क्रीन पर भी चीजें साफ नहीं दिख रही हैं।

कुछ ग्राहकों का यह भी कहना था कि बारिश होने पर कार की डिक्की में पानी भर जाता है और यह पानी धीरे-धीरे कार के अंदर तक चला आता है। वहीं कुछ ग्राहकों ने टेस्ला कार की रेंज को लेकर भी सवाल खड़े किए और कहा कि कार की रेंज कंपनी के दावे से कम है।

ग्राहकों का यह भी कहना था कि टेस्ला ने मुफ्त में चार्जिंग की सुविधा देने का दावा किया गया था, लेकिन कंपनी के चार्जिंग स्टेशन उनसे पैसे वसूल रहे हैं। कुछ लोगों ने टेस्ला कारों में आ रही चार्जिंग की समस्या पर भी सवाल उठाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के प्रदर्शन से वे एलन मस्क तक अपनी शिकायत पहुंचा सकते हैं और उन्हें जल्द ही इन समस्याओं से निजात मिलेगी। कार मालिकों ने 27 अगस्त से 28 अगस्त के बीच 24 घंटे तक भूख हड़ताल किया।

टेस्ला की बात करें तो, कंपनी का भारत में आने का रास्ता अभी साफ नहीं हो सका है। टेस्ला चाहती है कि भारत में प्लांट लगाए बगैर चीन से बनी बनाई कारों को इम्पोर्ट किया जाए। इससे टेस्ला को फायदा तो होगा लेकिन भारत में रोजगार के अवसर पैदा नहीं होंगे। भारत सरकार का कहना है कि अगर टेस्ला भारत में प्लांट लगाने के लिए तैयार होती है, तभी उसे भारत के बड़े बाजार में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।

फिलहाल, टेस्ला भारत में इम्पोर्ट रूट के जरिये कारें बेच रही है जिसका काफी अधिक इम्पोर्ट ड्यूटी लगाई जाती है। इस वजह से भारत में टेस्ला की कारें लगभग दोगुनी महंगी हो जाती हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन के शंघाई में गीगाफैक्ट्री को शुरू करने के बाद अब टेस्ला इंडोनेशिया में अपना दूसरा गिगाफक्टरी लगाने की योजना बना रही है। बता दें कि नवंबर 2021 में टेस्ला ने शंघाई के फैक्टरी का 200 मिलियन डॉलर के निवेश से विस्तार करने की घोषणा की थी।

चीन में टेस्ला कार की बढ़ती मांग पूरा करने और एक्सपोर्ट के लिए कंपनी उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है। इस फैक्टरी का निर्माण पूरा होने के बाद यहां हर साल 10 लाख इलेक्ट्रिक कारों का उत्पादन किया जाएगा।


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