भारतीय वायुुसेना में शामिल हुआ नया योद्धा 'तेजस', जानिए इसकी खूबियों के बारे में
लंबे इंतजार के बाद आखिरकार, स्वदेशी लड़ाकू विमान, तेजस भारतीय वायुसेना में आधिकारिक तौर से शामिल हो गया है। आज पारंपरिक सैन्य तरीके से बैंगलूरू में वायुसेना की स्कावड्रन स्थापित की गई। भारतीय वायुसेना को आज स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस की पहली स्कावड्रन मिल गई है। शुरूआत में इस स्कावड्रन में दो विमान होंगे। ये स्कावड्रन कोयम्बटूर के करीब शुलुर मे बेस होगी। शुरूआत के दो साल ये स्कावड्रन बैंगलुरू से ऑपरेट की जाएगी। Bike Review : जानिए कैसा है टीवीएस अपाचे का नया मॉडल आरटीआर 200 4वी एफआई

आपको बता देंं कि अभी तक तेजस को फाइनल ऑपरेशनल क्लीरियंस नहीं मिली है। यानि अभी तेजस सभी मानकों को पूरा किए बिना भी उड़ान के लिए तैयार है। इस बारे में वायुसेना के अधिकारियों कहना है कि "जल्द ही क्लीरियंस मिल जायेगी।गौरतलब है कि पिछले महीने ही वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अरूप राहा ने तेजस में उड़ान भरने के बाद कहा था कि "विमान पूरी तरह से एयरफोर्स में शामिल होने के लिए तैयार है।

जानकारी के मुताबिक, इस साल के अंत तक स्कावड्रन में तेजस विमानों की संख्या 06 तक पहुंच जायेगी। ये हल्के लड़ाकू विमान (लाइट कॉम्बेट एयरक्राफ्ट एलसीए) पुराने पड़ चुके मिग-21 की जगह लेंगे।यहां तक की नई 45-स्कावड्रन को वही 'फ्लाईंग डैगर्स' नाम दिया गया है जो मिग-21 का था।

अगले साल यानि 2017 तक इस स्कावड्रन में करीब 16 लड़ाकू विमान शामिल हो जायेंगे। वायुसेना एचएएल से 120 तेजस खरीदेगा।सूत्रों के मुताबिक, एक तेजस की कीमत करीब ढाई सौ (250) करोड़ रूपये है।1983 मे शुरू हुए इस प्रोजेक्ट की कीमत करीब 560 करोड़ रुपये थी, लेकिन अब इसकी कीमत 10,398 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
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