एग्जाम सेंटर पर पहुँचने के लिए 700 किलोमीटर का किया सफर, लेकिन फिर भी हो गया लेट
हाल ही में नीट एग्जाम हुए हैं तथा लॉकडाउन की वजह से सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह से खुले नहीं है। ऐसे में एग्जाम को पोस्टपोन कराने की भी बात की जा रही थी लेकिन एग्जाम कराए गये और इसी के चलते कई लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा है।

हाल ही में बिहार के एक लड़के ने कोलकाता में अपने एग्जाम सेंटर पर पहुँचने के लिए 24 घंटे लगातार सफर करके 700 किलोमीटर का सफर किया है। इस दौरान उन्होंने बस चेंज किये, कैब पकड़े, इसके बावजूद वह नीट सेंटर में पहुँचने के लिए 10 मिनट लेट हो गये।

इस 19 साल के लड़के ने बताया कि मैंने गार्ड को रिक्वेस्ट किया, प्रिंसिपल से मुलाकात भी की, लेकिन किसी ने भी जाने नहीं दिया। इस लड़के का नाम संतोष कुमार यादव है, इन्हें कोलकाता के एक प्राइवेट स्कूल ने एग्जाम में लेट होने की वजह से नहीं जाने दिया गया।

यह लड़का बिहार के दरभंगा के रहने वाले हैं, इस लड़के ने बताया कि शनिवार को उनकी बस बड़े जाम पर अटक गयी थी जिस वजह से लेट हो गये। उन्होंने बताया कि वह शनिवार की सुबह 8 बजे बिहार से बस से निकले थे। मुज्जफरपुर व पटना के बीच उन्हें बड़ा जाम मिला जिसमें 6 घंटे लेट हो गया।

वह पटना से करीब रात 9 बजे निकले थे और तथा रविवार को दोपहर 1 बजे कोलकाता पहुँचे थे। उसके बाद उन्होंने वहां से कैब लिया और वह सेंटर में दोपहर 1.40 बजे पहुँचे। एग्जाम सेंटर पर पहुँचने की डेडलाइन दोपहर 1.30 बजे थी, उनका टेस्ट 2 बजे शुरू होना था।

वह करीब दो दिनों से बस टिकट बुक करने की कोशिश कर रहे थे और आखिर में शनिवार को जाकर उन्हें टिकट मिला था। इसके बाद इस किसान के बेटे ने एग्जाम सेंटर पहुँचने के लिए कैब के लिए 300 रुपये चुकाया, अब उन्हें एक साल फिर से इंतजार करना पड़ेगा।

इस लड़के ने जाते जाते हुए कहा कि "मैंने एक कीमती साल खो दिया है। देखना होगा कि आगे क्या होगा, अगले साल के टेस्ट के लिए तैयारी करनी होगी।" उन्हें बस में सफर करने के दौरान अपना अधिक समय खोया जिस वजह से वह चूक गये।

हाल ही में बंगाल के पिता-पुत्र के ज़ज्बे की कहानी सामने आई है जिसमें पिता ने अपने बेटे को एग्जाम सेंटर पहुंचाने के लिए पहले तो छह घंटे साइकिल चलाई और फिर शहर के पास पहुंचकर सर्वाजनिक परिवहन से करीब 20 किलोमीटर का सफर तय किया।


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