टाटा की झोली में 68 साल बाद वापस आई Air India, रतन टाटा ने कहा - ‘वेलकम बैक’
कभी टाटा एयरलाइंस के नाम से पहचाने जाने वाली एयरलाइंस कंपनी एयर इंडिया (Air India) अब एक बार फिर टाटा की झोली में आ गई है। आज एयर इंडिया के लिए लगाई गई बोली को टाटा संस (Tata Sons) ने जित लिया है। टाटा संस ने 18,000 करोड़ रुपये में इंडियन एयरलाइंस की बोली लगाकर उसकी शत प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद ली है।

शुक्रवार को टाटा सन्स की इकाई Talace Pvt Ltd एयर इंडिया के लिए विनिंग बिडर रही। यह सौदा इस साल दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है। एयर इंडिया के लिए टाटा ग्रुप और स्पाइसजेट के अजय सिंह ने बोली लगाई थी। केंद्र सरकार कर्ज में डूबी एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच रही है।

इसके अलावा एयर इंडिया की ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी AISATS से भी 50 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है। इस डील के मुताबिक एयर इंडिया को 23,000 करोड़ रुपये के कर्ज के साथ नए मालिक को ट्रांसफर किया जाएगा। कंपनी का बाकी कर्ज एयर इंडिया एसेट होल्डिंग्स को ट्रांसफर किया जाएगा।

रतन टाटा ने कहा "वेलकम बैक"
बता दें कि बोली (Bidding) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा ने ट्विटर पर एक तस्वीर साझा करते हुए एयर इंडिया को "वेलकम बैक" कहा। उन्होंने कहा, "JRD Tata के नेतृत्व में एयर इंडिया दुनिया की प्रतिष्ठित एयरलाइंस कंपनियों में से एक थी। आज टाटा संस को एयर इंडिया की खोई हुई छवि और प्रतिष्ठा को वापस लौटने का अवसर मिला है। हम चुनिंदा उद्योगों को निजी क्षेत्र के लिए खोलने की हाल की नीति के लिए सरकार को धन्यवाद देते हैं।"

68 साल बाद हुई एयर इंडिया की हर वापसी
बता दें कि जहांगीर रतनजी दादाभाई (जेआरडी) टाटा ने 1932 में टाटा एयरलाइन्स की स्थापना की थी। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान भारत से विमान सेवाएं रोक दी गई थीं। विमान सेवाएं जब दोबारा बहाल हुईं तो, 29 जुलाई 1946 को टाटा एयरलाइंस का नाम बदलकर एयर इंडिया लिमिटेड कर दिया गया।

आजादी के बाद 1947 में एयर इंडिया की 49 फीसदी हिस्सदारी भारत सरकार ने ले ली, जिसके बाद 1953 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। अब 68 साल बाद एयर इंडिया की घर वापसी होने जा रही है। टाटा समूह ने एयरएशिया इंडिया (AirAsia India) के माध्यम से एयर इंडिया (Air India) के लिए बोली लगाई थी।

बता दें कि कर्ज का बोझ बढ़ने के बाद केंद्र सरकार 2017 से ही एयर इंडिया को बेचने के प्रयास कर रही थी। सरकार ने 15 दिसंबर 2020 तक बिड करने वाली कंपनियों का स्वागत किया था जिसमें टाटा संस और स्पाइस जेट ने रूचि दिखाई। हालांकि, सभी नियम व शर्तों को पूरा करने में टाटा संस कामयाब हुई।


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