सेना की ताकत को बढ़ाएंगे क्विक रिएक्शन फाइटिंग वाहन, टाटा ग्रुप ने डिलीवर की 10 यूनिट
टाटा ग्रुप की डिफेंस इकाई, टाटा एडवांस सिस्टम्स (Tata Advance Systems) ने भारतीय सेना को युद्ध क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली क्विक रिएक्शन फाइटिंग वाहनों की एक खेप की डिलीवरी की है। कंपनी ने इन वाहनों के एक काफिले का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है। जानकारी के अनुसार टाटा एडवांस सिस्टम्स ने भारतीय सेना को ऐसे 10 वाहनों की डिलीवरी की है।

क्या है क्विक रिएक्शन फाइटिंग व्हीकल?
क्विक रिएक्शन फाइटिंग वाहन बुलेटप्रूफ वाहन होते हैं युद्ध के समय सेना की टुकड़ी को एक जगह से दूसरी सुरक्षित जगह ले जाने के लिए किया जाता है। इन वाहनों पर गोलियों का कोई असर नहीं होता, साथ ही ये लैंड माइन से भी बचाव करते हैं। इन वाहनों के अंदर बैठने वाले सैनिकों को ग्रेनेड ब्लास्ट से भी बचाया जा सकता है।

आपको बता दें कि टाटा मोटर्स कई देशों को भारत में निर्मित क्विक रिएक्शन फाइटिंग वाहनों की डिलीवरी कर रही है। भारत से पीस कीपिंग मिशन में शामिल होने वाले सैनिक भी इन वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। ये क्विक रिएक्शन वाहन 4X4 ड्राइवट्रेन क्षमता के साथ आते हैं जिसके वजह से इनसे कितनी भी कठिन रास्तों और चढ़ाई को आसानी से पार किया जा सकता है।

टाटा के क्विक रिएक्शन फाइटिंग वाहन लेवल-4 ब्लास्ट प्रोटेक्शन के साथ आते हैं। इस तरह के वाहन 14 से 21 किलोग्राम के एक्सप्लोसिव के धमाके को भी झेलने में सक्षम होते हैं। ये वाहन ड्राइवर सहित 14 सैनिकों को ले जा सकते हैं। युद्ध क्षेत्र में जरूरत पड़ने पर इन वाहनों के ऊपर मशीन गन भी लगाया जा सकता है।

दमदार इंजन से है लैस
टाटा क्विक रिएक्शन फाइटिंग वाहनों में दमदार डीजल इंजन लगाया गया है जो 240 बीएचपी की अधिकतम अधिकतम पॉवर जनरेट करता है। इन वाहनों में 2 टन का अधिकतम भार ले जाया जा सकता है। सभी तरह के रास्तों में चलाने के लिए इनमें ऑल-टरेन टायर लगाए गए हैं।

आपको बात दें कि हाल ही में भारतीय सेना ने लद्दाख में सीमा की निगरानी करने के लिए मेड-इन-इंडिया इन्फेंट्री कॉम्बैट वाहनों को शामिल किया है। ये वाहन लद्दाख सीमा पर सेना की गतिविधियों को बढ़ाने और सहायता पहुंचाने में तेजी लाने के लिए शामिल किए गए हैं। इन वाहनों को संयुक्त रूप से रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और टाटा समूह (Tata Group) द्वारा विकसित किया गया है।

केंद्र सरकार ने सेना को भारत में निर्मित वाहनों की आपूर्ति करने के लिए 50,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को स्वीकृति दी है। मौजूदा समय में कॉम्बैट वाहनों के लिए भारतीय सेना की निर्भरता रूस और अमेरिका में बने वाहनों पर अधिक है। हालांकि, अब मेड-इन-इंडिया अभियान के तहत देश की कई कंपनियां सेना की जरूरत को पूरा करने के लिए सामने आ रही हैं।

बात चलें कि वर्तमान में टाटा, महिंदा एंड महिंद्रा, भारत फोर्ज, कल्याणी और लार्सन एंड टूब्रो जैसी कंपनियां सेना के लिए हल्के और भारी वजन के कॉम्बैट वाहन बना रही हैं।


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