'सोलर रिक्शा' आईआईटी दिल्ली के कैंपस में हुई शुरु, जानिये कैसे करती है काम
देश में आईआईटी हमेशा से इनोवेशन के माध्यम से लोगों के जीवन को बेहतर बनाने का काम करते आ रही है लेकिन इस बार आईआईटी में काम करने वालों रिक्शा वालों की जिंदगी में बदलाव किसी और ने लाया है।

हाल ही में सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सीईएल) ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिल्टी के तहत आईआईटी दिल्ली के रिक्शा चालकों क 10 सोलर रिक्शा प्रदान किये है, जिन्हें अब कैंपस के भीतर उपयोग किया जाना है।

सीईएल ने इन स्पेशल रिक्शा में 300 वॉट सोलर पैनल का प्रयोग किया गया है जो कि इसके छत के रूप में लगाया गया है। यह पैनल दिन भर चार्ज होते रहेंगे तथा रिक्शा की गति को भी बढ़ाने का काम करेंगे। अब यह रिक्शा सोलर पैनल की मदद से एक दिन में दोगुनी दूरी तय कर सकते है।

इस तरह से यह सोलर रिक्शा शारीरिक मेहनत को कम करने में मददगार साबित होंगे। साथ ही आईआईटी दिल्ली के रिक्शा चालक इसकी मदद से दिन में अधिक दूरी तय करके अपनी कमाई को और भी बढ़ा सकते है।

उत्पादकों ने सोलर रिक्शा की खूबियां बताते हुए कहा कि इनकी औसत गति 10-15 किमी/घंटे है लेकिन यह 25 किमी/घंटे की गति तक भी पहुँच सकते है। जहां एक ई-रिक्शा की कीमत 1.25 लाख रुपयें तक होती है, इन हाइब्रिड रिक्शा की कीमत सिर्फ 68,000 रुपयें है।

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हालांकि यह सोलर पॉवर वाले हाइब्रिड रिक्शा सिर्फ कैंपस के अंदर चलाये जा सकते है तथा इन्हें बाहर उपयोग नहीं किया जा सकता है। इन रिक्शाओं को मोटर वाहन अधिनियम के तहत रजिस्टर नहीं किया जा सकता है।

आईआईटी के डॉयरेक्टर राम गोपाल राव ने सीईएल के इस कदम तकनीक, परंपरा व सहानुभूति का उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि "यह इनोवेशन पांरपरिक ज्ञान व मॉडर्न तकनीक का मिश्रण है जो पर्यावरण, काम की जरूरत व सुविधा के बीच सामंजस्य पैदा करता है।

आईआईटी के डॉयरेक्टर ने सोलर रिक्शा को एक अच्छी शुरुआत कहते हुए बताया कि यह रिक्शा चालाक कैंपस में 2002-03 से काम कर रहे है। यह रिक्शा अब इन लोगों के काम को कम थकाऊ बनाने में मदद करेगा।

ड्राइवस्पार्क के विचार
सोलर रिक्शा एक अच्छी शुरुआत मानी जा सकती है तथा शुरूआती चरणों में ऐसे ही अलग अलग जगहों पर इनका प्रयोग किया जा सकता है। यह कम पैसे में भी मिल जाते तथा कमाई भी बढ़ाती है। इस तरह के नए प्रयोगों को बढ़ावा देने की जरूरत है।
Image Courtesy: Times of India


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