देश में अगले 2-3 सालों के भीतर शुरू होगा सेमीकंडक्टर चिप का उत्पादन
केंद्र सरकार ने हाल ही में सेमीकंडक्टर चिप के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 76 हजार करोड़ रुपये की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई स्कीम) की घोषणा की है। बताया जाता है कि अगले 2-3 सालों में देश में घरेलू आवश्यकता के लिए सेमीकंडक्टर का उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। चिप निर्माण उद्योग के क्षेत्र में संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए, सरकार अगले साल जनवरी से पीएलआई स्कीम के तहत आवेदन लेना शुरू करेगी।

स्वीकृत पीएलआई योजना में अगले पांच से छह वर्षों में देश में सेमीकंडक्टर निर्माण में 76,000 करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की गई है। अगले कुछ महीनों के भीतर कंपाउंड सेमीकंडक्टर इकाइयों, डिजाइन और पैकेजिंग कंपनियों को मंजूरी दी जाएगी।

केंद्रीय सुचना एवं प्रोद्यौगिकी मंत्री वैष्णव जैन ने कहा कि अगले 2-3 वर्षों में लगभग 10-12 कंपनियां सेमीकंडक्टर का उत्पादन शुरू करेंगी। उन्होंने कहा कि इस दौरान लगभग 50-60 डिजाइनिंग कंपनियां भी सेमीकंडक्टर उत्पादन से जुड़ जाएंगी। बता दें कि देश में चिप निर्माण के लिए पीएलआई योजना ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर के ऑटो उद्योग को पुर्जों की कमी के कारण उत्पादन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

इस कदम से देश के ऑटो सेक्टर को काफी मदद मिलने की उम्मीद है। महामारी के बाद चिप की मांग आसमान छू गई है क्योंकि उपभोक्ता तकनीकी उत्पाद की मांग, जो चिप का भी उपयोग करती है, लॉकडाउन के दौरान तेजी से बढ़ी है।

चिप निर्माताओं ने भी अपनी उत्पादन क्षमता को उसी के अनुसार स्थानांतरित कर दिया। लेकिन बाद में जब ऑटो उद्योग ने लॉकडाउन के बाद परिचालन फिर से शुरू किया, तो माइक्रोचिप्स की मांग में काफी वृद्धि हुई, और एक बड़ा व्यवधान उत्पन्न हुआ क्योंकि चिप निर्माता मांग को पूरा करने में असमर्थ हो गए।

चिप संकट के शुरू होते ही स्थानीय चिप निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के बारे में चर्चा शुरू हो गई, जो ऑटो उद्योग और उससे संबंधित क्षेत्रों का भी समर्थन कर सके। माइक्रोचिप निर्माण क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना की घोषणा से चिप की समस्या का समाधान होने की उम्मीद है।

क्या होते हैं सेमीकंडक्टर
सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक चिप होते हैं जिन्हें सिलिकॉन से बनाया जाता है। ये कारों के इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में करंट को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इनके बिना आज कारों की कल्पना ही नहीं की जा सकती। मौजूदा समय में बाजार में जितनी भी कारें उपलब्ध हैं, सभी में सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल किया जाता है। इनके बिना कारों को हाईटेक नहीं बनाया जा सकता।

कारों में डिस्प्ले पैनल, नेविगेशन, लाइट, पावर स्टीयरिंग और लगभग सभी ऑटोमैटिक फीचर्स में सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल किया जाता है। चिप्स की कमी की वजह से ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में सेमीकंडक्टर की भारी कमी हो गई है, इसलिए कारों का उत्पादन तय संख्या में नहीं हो रहा है।

क्यों हुई सेमीकंडक्टर की कमी
सेमीकंडक्टर को अलग-अलग प्रकार के सैकड़ों चिप से बनाया जाता है। अभी सबसे अच्छी गुणवत्ता के चिप की सप्लाई फिलहाल क्वालकॉम इंक और इंटेल कॉर्प कंपनियां कर रही हैं। हालांकि, वैश्विक कोरोना महामारी ने कंपनियों की चिप की सप्लाई को बाधित कर दिया है। इसी वजह से ये कंपनियां डिमांड के अनुसार सेमीकंडक्टर का उत्पादन नहीं कर पा रही हैं।

स्मार्टफोन, टीवी, ऐसी जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में सेमीकंडक्टर की डिमांड बढ़ गई है जिससे निर्माण करने वाली कंपनियां आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं। इसी कारण से कारों में लगने वाले कुछ सेमीकंडक्टर चिप की कीमत में भारी उछाल आया है। कारों में लगने वाले डिस्प्ले ड्राइवर चिप की कीमत बढ़ गई है, जिनका इस्तेमाल टेलीविजन, लैपटॉप, कार और विमानों के उत्पादन में भी होता है।

अब हाल में बिजली प्रबंधन (पॉवर मैनेजमेंट) चिप्स की भी वैश्विक बाजार में कमी हो गई है। इसकी वजह से फोर्ड मोटर, निशान, फॉक्सवैगन आदि जैसी कंपनियों को अपने उत्पादन में कटौती करनी पड़ रही है। एक अनुमान के मुताबिक इस चिप की सप्लाई में कमी के कारण दुनिया में कार उद्योग इस साल 60 अरब डॉलर का नुकसान हो चुका है।


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