दिल्ली में ई-ऑटो परमिट के खिलाफ बजाज ऑटो की याचिका हुई खारिज, कोर्ट ने दिया प्रदूषण बढ़ने का हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बजाज ऑटो द्वारा इलेक्ट्रिक ऑटो रिक्शा को 4,200 से अधिक परमिट जारी करने के दिल्ली सरकार के फैसले के खिलाफ दायर एक याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि दिल्ली में स्थानीय लोग वायु प्रदूषण से प्रतिकूल रूप से प्रभावित हैं। बजाज ऑटो ने शीर्ष अदालत का रुख किया था और कहा था कि दिल्ली सरकार का कदम सीएनजी ऑटो रिक्शा बनाने वालों के खिलाफ 'मनमाना' और 'भेदभावपूर्ण' है।

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बजाज ऑटो ने अपनी याचिका में कहा था कि दिल्ली सरकार का फैसला बाजार के अवसरों को सीमित करने की ओर इशारा करता है। कंपनी का मानना है कि यह निर्णय नए सीएनजी ऑटो पर अप्रत्यक्ष प्रतिबंध के समान है, और यह भी तर्कसंगत आधार या समझदार अंतर के बिना वाहनों के एक वर्ग के लिए बाजार के अवसरों को प्रतिबंधित करने के बराबर है।

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कोर्ट ने दिल्ली सरकार के फैसले को कहा तर्कसंगत

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा जारी किया गया विज्ञापन जिसके माध्यम से उसने इलेक्ट्रिक ऑटो रिक्शा के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं, FAME-II योजना और इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2020 के अनुरूप है।

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बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा, "दिल्ली के निवासी इससे बुरी तरह प्रभावित हैं। वायु प्रदूषण में, निस्संदेह वाहनों का एक बड़ा योगदान है। भले ही CNG ऑटो BS-VI के अनुरूप हों, फिर भी कुछ मात्रा में कार्बन उत्सर्जन होता है।"

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जजों की बेंच ने कहा कि इस मामले में आवेदक बजाज ऑटो के मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं किया गया है। दिल्ली सरकार ने पहले ही बताया था कि दिल्ली में सीएनजी पर चलने वाले 92,000 से अधिक ऑटो रिक्शा पंजीकृत हैं और पुराने सीएनजी वाहनों को बदलने की प्रक्रिया जारी है।

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दिल्ली में जारी हुआ 4,261 ई-ऑटो परमिट

बता दें कि दिल्ली सरकार ने इस साल अक्टूबर में 4,261 ई-ऑटो को परमिट जारी करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें 1,406 ई-ऑटो परमिट महिलाओं के लिए आरक्षित किये गए थे। ई-ऑटो परमिट के लिए दिल्ली परिवहन विभाग ने ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किया था।

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ई-ऑटो खरीदने वाले ग्राहक दिल्ली सरकार द्वारा नामांकित वित्तीय एजेंसियां ​​से पांच प्रतिशत की ब्याज दर में छूट के साथ ऑटो के लिए ऋण ले सकेंगे। दिल्ली परिवहन विभाग ने 25 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक आईडीटीआर सराय काले खां और लोनी में एक 'ई-ऑटो मेला' भी आयोजित किया था।

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ई-ऑटो पर 30 हजार रुपये की सब्सिडी

दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत ई-ऑटो की खरीद पर 30,000 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। कोई भी व्यक्ति जिसके पास दिल्ली का पता, हल्के मोटर वाहन का वैध ड्राइविंग लाइसेंस या टीएसआर ड्राइविंग लाइसेंस के साथ आधार संख्या है, वह ई-ऑटो परमिट के लिए आवेदन करने के लिए पात्र होगा।

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दिल्ली में सब्सिडी के बाद एक ई-ऑटो की कीमत 2.70 लाख रुपये होगी जो कि एक सीएनजी ऑटो की कीमत के बराबर है। वहीं बैटरी स्वैपिंग तकनीक वाली ई-ऑटो सब्सिडी के बाद लगभग 1.80 लाख रुपये में उपलब्ध होगी।

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दिल्ली सरकार ने अगस्त, 2020 में इलेक्ट्रिक वाहन नीति की घोषणा की थी। अपनी ईवी नीति दिल्ली सरकार ने 2024 तक 24 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों को उतारने का लक्ष्य रखा है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स में सब्सिडी दे रही है।

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दिल्ली में PUC सर्टिफिकेट हुआ अनिवार्य

दिल्ली में सर्दियों के पहले प्रदूषण से निबटने के लिए सरकार ने वैद्य पीयूसी सर्टिफिकेट (Pollution Under Control Certificate) को अनिवार्य कर दिया है। अब दिल्ली में बगैर वैद्य पीयूसी सर्टिफिकेट के वाहन चलाते पकड़े जाने पर 10,000 रुपये का जुर्माना लग सकता है। यही नहीं, अगर वाहन का पीयूसी नहीं करवाया है तो 3 महीने तक ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने के साथ 6 महीने की जेल भी हो सकती है।

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Article Published On: Wednesday, December 15, 2021, 16:06 [IST]
English summary
Sc dismisses bajaj auto plea against permit to 4000 e auto details
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