77 सालों तक चलाई रोल्स रॉयस की कार, 2.5 लाख किमी चलने के बाद भी है पूरी फिट
रोल्स रॉयस दुनिया की उन पुरानी कार कंपनियों में एक है जो अब भी कारों का उत्पादन कर रही है। एक कार निर्माता के तौर पर रोल्स रॉयस की स्थापना ब्रिटेन में 1904 में की गई थी। तभी से कंपनी लग्जरी कारों के निर्माण के लिए जानी जाती है। हाल ही में रोल्स रॉयस की एक कार और उसके मालिक की तस्वीर इंटरनेट पर वायरल हो रही है।

बताया जाता है कि यह अमेरिका के एलन स्विफ्ट दुनिया में एकमात्र ऐसे व्यक्ति है जिन्होंने 77 साल तक रोल्स रोये की कार का इस्तेमाल किया है। हालांकि, एलन अब जीवित नहीं है लेकिन उनकी कार की चर्चा आज पूरी दुनिया में हो रही है। एलन जिस कार के साथ तस्वीरों में दिख रहे हैं वह 1928 की रोल्स रॉयस है जो 2.75 लाख किलोमीटर तक चली है।

सबसे खास बात यह है कि यह कार एक बार भी खराब नहीं हुई है। जानकर बताते हैं कि इस कार का इंजन इस तरह से बनाया गया है कि इसमें एक बार भी कभी कोई बड़ी समस्या नहीं आई और इसे कभी खुलवाने की भी जरूरत नहीं पड़ी। यह भी कहा जाता है कि एलन इस कार का काफी ख्याल रखते थे इसलिए यह कार 77 साल तक उनके साथ थी।

बताया जाता है कि एलन स्विफ्ट को सम्मानित करने के लिए रोल्स रॉयस ने क्रिस्टल 'स्पिरिट ऑफ एक्स्टसी' का निर्माण किया है। एलन स्विफ्ट का जन्म 1903 में हुआ था। उनका बचपन से ही कारों में काफी लगाव था। 1917 में जब वह 24 साल के थे तब उन्होंने फ्रेंक्लिन कार खरीदी थी। उनकी दूसरी कार मार्मोन थी।

उनके पिता ने उन्हें 26 जन्मदिन के अवसर पर गिफ्ट के तौर पर रोल्स रॉयस कार दी थी। उन्हें रोल्स रॉयस की कारों से इतना लगाव था की उन्होंने अमेरिका के स्प्रिंगफील्ड शहर में रोल्स रॉयस कारों का म्यूजियम बना डाला। इस म्यूजियम में उन्होंने रोल्स रॉयस की कई मॉडलों के साथ अपने पिता और छोटे भाई की इस्तेमाल की हुई कारों की प्रदर्शनी रखी है।

बता दें कि स्प्रिंगफील्ड में ही रोल्स रॉयस का प्लांट भी है। इस प्लांट में एलन अक्सर कारों को बनते हुए देखने जाया करते थे। वह बताते है कि प्लांट में हर कार काफी सावधानी से साथ तैयार की जाती है। कार के हर पुर्जे को कई मापदंडों पर जांचा परखा जाता है। कार के इंजन की भी कई चरणों के टेस्ट से गुजारा जाता है।

वे बताते हैं कि जब कार पूरी तरह तैयार हो जाती है तब इसे कुछ घंटों के लिए चलाया जाता था। इस दौरान कार के इंजन से निकलने वाली आवाज को जांचने के लिए एक कर्मचारी कई घंटों तक स्टेथोस्कोप लेकर इसे सुनता था। इसके बाद कार को 200 मील चला कर इसे अंतिम बार टेस्ट किया जाता था।


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