मध्य प्रदेश की सड़कें अमेरिका जैसी, दावे में कितना दम, आइए जानते हैं...
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्य प्रदेश की सड़कें अमेरिका से बेहतर हैं। आइए इसे परखते हैं।
अगर कोई सरकार काम करें तो उसे उसका न केवल श्रेय दिया जाना चाहिए बल्कि उसकी तारीफ करने में भी कोताही नहीं बरतनी चाहिए। ये कुछ ऐसी बातें हैं जिन्हें कल लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर हर्क्यूलिस विमान उतारे जानें के बाद कहा जा रहा है। ठीक है। अच्छी बात है। जिसने काम किया उसे श्रेय तो मिलना ही चाहिए।

लेकिन अभी आज ही जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्य प्रदेश की सड़के अमेरिका से बेहतर हैं तो इस बात के लिए लोगों ने न केवल उनका मजाक उड़ाया बल्कि एक मीडिया संस्थान अपना लाव लश्कर लेकर एमपी भी पहुंच गया और बता दिया कि मुख्यमंत्री के दावे की पोल उनका खुद पीडब्ल्यूडी मंत्री खोल रहा है और मध्य प्रदेश की सड़कें जर्जर अवस्था में है।

चलिए अगर सड़क कहीं खराब है या कहीं मूलभूत सुविधाओं की कमी है तो उसे सबको दिखाना चाहिए और जितना हो सके सरकार की आलोचना भी करनी चाहिए लेकिन अगर इतने बड़े राज्य का मुख्यमंत्री अपनी अमेरिका यात्रा से लौटकर यह कह रहा है कि मध्य प्रदेश की सड़कें अमेरिका से बेहतर हैं तो कहीं न कहीं कोई न कोई बात जरूर होगी?

खैर। ट्रोल के इस दौर में किसी के पास इतना समय नहीं है कि वह किसी की कही बात को परखने में अपना समय खर्च करे। अब तो हिट करो और चलते बनो का जमाना है। फिर भी आपको कुछ बताना चाहता हूं।
इसके लिए आज से कुछ साल पीछे जाते हैं और बताते हैं कि अभी ज्यादा समय नहीं बीता है जब इलाहाबाद से लेकर रीवा के 125 किमी के सफर में व्यक्ति की हालत ऐसी हो जाया करती थी जैसे किसी ने गिराके गिराके मारा हो।

यही नहीं राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 27 पर आम लोग आने से डरते थे और इतने बड़े सफर में प्रत्येक गाड़ियों को हर चार मीटर पर एक बड़े गढ़्ढ़े को झेलना पड़ता था। इस मार्ग में भाग्यशाली वही व्यक्ति माना जाता था जो सकुशल घर पहुंच जाता था और वेहिकल वही मजबूत होती जो यह बाधा पार कर लेती थी।
लाल रंग के मोरंग की धूल से व्यक्ति खुद हनुमान सरीखा बन जाया करता था और खुद न खास्ता उस साइड में जिस व्यक्ति की ससुराल पड़ा करती थी। वह व्यक्ति एक बार रास्ते में ही स्नान करके आगे कदम बढ़ाया करता था।

यही हाल मिर्जापुर से हनुमना बार्डर होते हुए रीवा(राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या7) जाने वालों का भी हुआ करता था और इन दोनों मार्गों की सबसे बाधा गंगा के मैदानी क्षेत्र से सीधी चढ़ाई चढ़कर के घाट के उपर क्षेत्र में आना पड़ता था। यानि इन दोनों ही मार्गों से रीवां की ओर जाने वालों को सीधी पहाड़ की चढ़ाई चढनी पड़ती थी और दोनो हाइवेज का मिलान रीवा से पहले मनगवां नामक जगह पर हो जाया करता था।

लेकिन वक्त बदला, वक्त के साथ सुरत बदली और इस सुरत के साथ वह यात्रा अनुभव बदल गया जो पहाड़ जितना बड़ा और तुफानों जैसा मुश्किल था और इसका पूरा श्रेय अगर किसी व्यक्ति को जाता है तो उसका नाम शिवराज सिंह चौहान है।

जिनके सरकार में आने के बाद एक तरह से खराब सड़कों के लिए बदनाम हो चुके मध्य प्रदेश के रीवां जिले की सुरत बदल कर रख दी। हालंकि हम यहां पर यह दावा नहीं करते हैं कि शिवराज ने मध्य प्रदेश की सारी सड़कें ठीक कर दी हैं लेकिन बात अमेरिका सरीखे सड़कों की हो रही है तो तस्वीर में दिखाई पड़ रही सड़क को जरूर देंखे।

यह रीवा से हनुमना को जोड़ने वाली वह सड़क है जो सड़क निर्माण की जापानी इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट नमूना है, जो लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे को टक्कर देती नजर आती है। इसके अलावा मनगवां से इलाहाबाद को जोड़ने वाली फोरलेन सड़क का निर्माण चाकघाट बार्डर तक 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है और उधर रीवा से हनुमना बार्डर का कार्य भी लगभग पूरा ही हो चुका है।

जानकारी के मुताबिक इस सड़क को बनाने का कार्य दीलिप विल्डिकान कम्पनी के पास है और दावा है कि दीलिप विल्डिकान कम्पनी ने अमेरिका में भी सड़क बनाने का कार्य किया है। आपको बता दें कि दिलीप बिल्डकॉन देश की एक प्रमुख बिल़्डिंग कम्पनी है और इसका मप्र ही नहीं, बल्कि देश के 12 राज्यों में 64 प्रोजेक्ट चल रहे हैं।

अब इधर समस्या उत्तर प्रदेश के बार्डर से शुरू होती है और अब यहां उनकी सहयोगी ही सरकार है। सरकार को अब चाहिए कि वह चाकघाट से इलाहाबाद तक और हनुमना से वाराणसी तक के निर्माण कार्य को पूरा करवाए। बाकी मध्य प्रदेश की अमेरिका सरीखे सड़कों के बारे में जानने के लिए नीचे दिए जा रहे मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम लिमिटेड की यह अधिकारिक वेबसाइट को सर्च ना करना ना भूलें।


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