रोड एक्सिडेंट का कभी शिकार नहीं हो सकेंगे आप, जानिए कैसे
नई दिल्ली। कहते हैं कि अपनी सुरक्षा अपने ही हाथ होती है मगर तब क्या जब आप खुद ही अपनी सुरक्षा का मज़ाक उड़ाने लगे, फिर ऐसे में एक ही सहारा बचता है वह है कि डर !!

एक ऐसा डर जिससे आपको सुरक्षा नियमों का पाठ पढ़ाया जाए, डर की मदद से आपको सही और गलत के बीच की लकीर के अंतर को समझाया जाये। आप यही सोच रहे होंगे की यह सुरक्षा और डर की बात क्यों हो रही है तो आपको बताते चले की सुरक्षा से मेरा तात्पर्य है सड़क दुर्घटनाओं से बचने के लिए सड़क सुरक्षा नियमों को डर के साथ पालन करवाना।

चालान के डर से पहनते हैं हेलमेट
दरअसल हम में से कई लोग ऐसे हैं जो की ट्रैफिक नियमों को ताक पर रख कर इनकी अनदेखी करते हैं। वे भूल जाते है कि यह नियम सरकार और क़ानूनी संस्थाओ ने खुद की देखरेख के लिए नहीं बल्कि आपकी हमारी और उन सभी लोगो की हिफ़ाज़त के लिए बनाए हैं जो की सड़क पर चलते हैं।
मोटर व्हीकल एक्ट(कानून)
यूँ तो हमारे देश में अलग से मोटर व्हीकल एक्ट(कानून) है जिसके तहत ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर मोटरयान के रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता तक का उल्लेख है और किसी भी दुर्घटना के दोषी पाए जाने पर सख्त सज़ा का भी प्रावधान है मगर हम इन नियमों की परवाह किये बगैर इनकी धज़्ज़िया उड़ाते रहते हैं।
डर से ही सही पहनिये तो हेलमेट
वैसे यह भी सही है की अगर किसी प्रकार का डर पैदा करके लोगो में एक ज़िम्मेदारी का एहसास लाया जा सके तो कुछ बुरा नही इसमें ।फैसला अब आपको करना है कि आप यूँ ही अपनी सुरक्षा से खिलवाड़ करते रहेंगे और डर की वजह से नियमों का पालन करने को बेबस होते रहेंगे या फिर अपनी इस महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी को समझते हुए एक ज़िम्मेदार नागरिक होने का कर्तव्य निभाएंगे।
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