सड़क हादसों में आई 3.9 प्रतिशत की कमी, 2019 में हुईं 4.49 लाख सड़क दुर्घटनाएं
केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने साल 2019 में सड़क हादसों के आंकड़ों को लोकसभा में साझा किया है। गडकरी ने कहा कि साल 2019 में सड़क दुर्घटनाओं में 1,51,113 लोगों की मौत हुई जो 2018 की तुलना में 0.20 प्रतिशत कम है। लोक सभा में एक लिखित जवाब देते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि 2019 में कुल 4,49,002 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं जो ठीक एक साल पहले (2018) की तुलना में 3.9 प्रतिशत कम है।

लोक सभा में जवाब देते हुए गडकरी ने सड़क हादसों के कई मुख्य कारणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ओवरस्पीडिंग, शराब पीकर गाड़ी चलाना, गलत साइड में ड्राइविंग, सीट बेल्ट का इस्तेमाल न करना, और ड्राइविंग करते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल, सड़क हादसों के कुछ मुख्या कारण है।

गडकरी ने लोकसभा में जवाब दिया, "मंत्रालय ने शिक्षा, इंजीनियरिंग, प्रवर्तन और आपातकालीन देखभाल के आधार पर सड़क सुरक्षा के मुद्दे को हल करने के लिए एक बहु-आयामी रणनीति तैयार की है।"

उन्होंने आगे कहा कि मंत्रालय ने सड़क पर ब्लैक स्पॉट (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) को चिन्हित कर उनमें सुधार कर रही है। उन्होंने आगे बताया कि मंत्रालय नए प्रोजेक्ट्स में सड़कों के डिजाइन को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किये हैं। सड़कों में तकनीकी रूप से सुधार के लिए स्थानीय अधिकारियों को ब्लैक स्पॉट चिन्हित करने का काम सौंपा गया है और जल्द से जल्द नए सुधारों को लागू करने का आदेश जारी किय गया है।

बता दें कि, हाल ही में नितिन गडकरी ने राजमार्गों पर वाहनों की गति सीमा को 20 किमी प्रति घंटे तक बढ़ाने का फैसला लिया है। मंत्रालय के अधिकारियों के साथ एक बैठक में, गडकरी ने कहा कि समय के साथ राजमार्गों की स्थिति में सुधार हुआ है, इसलिए अब वाहनों की गति को बढ़ाने और यात्रा के समय को कम करने पर ध्यान देना आवश्यक है।

नितिन गडकरी ने देश में पब्लिक ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक को 100 प्रतिशत स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में स्थानांतरित करने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले दशक में हरित ऊर्जा में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने कहा कि भारत 2022 तक 175 गीगावाट की ऊर्जा अक्षय ऊर्जा स्रोतों से तैयार करेगा।

गडकरी ने आगे कहा कि देश में वैकल्पिक परिवहन संसाधनों का तेजी से विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और हिमाचल जैसे राज्यों में रोपवे और केबल कार का चलन बढ़ रहा है। इन संसाधनों को हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट से उत्पन्न बिजली से संचालित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अक्षय ऊर्जा स्रोत भारी संख्या में रोजगार का सृजन भी कर रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार 2050 तक अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं से लगभग 30 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक्स में एलएनजी और हाइड्रोजन को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है।


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