कारगिल विजय दिवस के मौके पर सैकड़ों बाइकर्स ने सैनिकों के साथ चलाई बाइक, शहीदों को किया याद
कारगिल विजय दिवस के मौके पर आयोजित की गयी 'राइड विथ सोल्जर्स' कार्यक्रम में बैंगलोर वासियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और इसके लिए सैकड़ों बाइकर्स ने साथ में राइड किया। यह कारिगल की जंग में शहीद हुए जवानों के साहस को सलाम देने के लिए रखा गया था।
यह कार्यक्रम शी फॉर सोसायटी (एनजीओ), ए7 एंटरटेनमेंट, श्री हरि राजू (क्षेत्र लग्जरी रिसोर्ट के फाउंडर व एमडी), डा। के जे पुरुषोत्तम (सीकेपीसी के फाउंडर व एमडी), तथा अखिल कर्नाटक एक्स-सर्विसमेन एसोसिएशन ने मिलकर आयोजित किया था।

इस कार्यक्रम में कारगिल के दो हीरो, नवीन नागप्पा, तथा कर्नल ऊमन जेकब को समानित किया गया। राइड विथ सोल्जर्स कार्यक्रम सुबह 6 बजे मानेकशा परेड ग्राउंड्स से शुरू हुआ, जहां कई लोग सपोर्ट जाहिर करने के लिए इकठ्ठा हुए थे।
करीब 7।30 बजे, ब्रिगेडियर राजेश पैनिकर वीएसएम ने इस बाइक रैली को हरी झंडी दिखाई। इस रैली में 300 वीर नारी (शहीदों की विधावाएं) तथा भूतपूर्व-सैनिक शामिल थे। इसमें सैनिकों के साथ, टोरनाडोस, व बीएसएफ सैनिक भी शामिल थे।

यह बाइक रैली बीजीएस ग्राउंड्स विजयानगर में समाप्त हुई। इस दौरान राइडर्स व वीर नारियों द्वारा बीजीएस ग्राउंड्स पर 1000 फीट का झंडा फहराया गया। साथ ही, ड्रमज इंडिया लिमिटेड ने शानदार ड्रम प्रदर्शन से दर्शकों का मन मोह लिया।
अमर जवान मूर्ति के पास पुष्पांजलि अर्पित की गयी, जहां राइडर्स व दर्शकों ने कारगिल की जंग में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी। अंततः इसके बाद टोरनाडोस द्वारा बाइक स्टंट शो किया गया, जिसने फिर से दशकों को अपनी ओर आकर्षित किया।

कुल मिलाकर, राइड विथ सोल्जर्स कार्यक्रम सफल रहा क्योकि इसने कारगिल विजय दिवस की महत्व के बारें में जागरूकता फैलाने का काम किया। हम यहीं आशा करते है कि यह और इस तरह के देशभक्ति से भरे कार्यक्रम प्रति वर्ष बड़े स्तर पर आयोजित किये जाते रहें।
राइड विथ सोल्जर्स जैसा कार्यक्रम समाज के हर वर्ग के नागरिक को देश के जवानों द्वारा दिए गये बलिदान का स्मरण करता है तथा प्रेरणा देता है। दिल्ली में भी सैनिकों के श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए, 25 महिला राइडर्स द्रास के बाइक ट्रिप पर गयी थी।
यह आल-वूमन मोटरसाइकिल रैली नेशनल वार मेमोरियल, नई दिल्ली से 18 जुलाई को शुरू की गयी थी। यह रैली 1000 किलोमीटर की दूरी तय करके 26 जुलाई को अंतिम डेस्टिनेशन द्रास, लद्दाख पहुंची, जहां सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गयी।


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