Reflector Vs Projector Headlamp: जानिए आपकी कार में लगे हैं कौन से हेडलैंप, और दोनों में क्या है अंतर
आज से कुछ समय पहले कार हेडलैंप बेहद सिंपल पार्ट्स हुआ करते थे जिसपर कस्टमर्स ज्यादा सोचते नहीं थे। हमें अक्सर महंगे कार वैरिएंट्स पर प्रोजेक्टर हेडलैंप जबकि सस्ते मॉडल पर रिफ्लेक्टर हेडलैंप देखने को मिलते हैं। पहले हेडलैम्प्स पर कोई आधुनिक या महंगी टेक्नोलॉजी इस्तेमाल नहीं की जाती थी, लेकिन अब बाजार में कई तरह के हेडलैम्प्स मौजूद हैं। आज भी कई लोग रिफ्लेक्टर हेडलैंप वाली कारों को ज्यादा पसंद करते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि रिफ्लेक्टर और प्रोजेक्टर हेडलैंप में क्या अंतर है और ये आपके ड्राइविंग के अनुभव को कैसे बदल सकती हैं -

रिफ्लेक्टर हेडलाइट क्या है और कैसे करता है काम
रिफ्लेक्टर हेडलाइट का इस्तेमाल कारों में काफी लंबे समय से किया जा रहा है। यह काफी पुरानी टेक्नोलॉजी है, जिसमे बल्ब की रौशनी को दिशा देने के लिए स्टील रिफ्लेक्टर या मिरर केस का इस्तेमाल किया जाता है। रिफ्लेक्टर हेडलाइट में बल्ब को रिफ्लेक्टर केस के बीच में रखा जाता है। यह रिफ्लेक्टर बल्ब से निकलने वाली रौशनी को बाहर रिफ्लेक्ट करता है।

आजकल अधिकांश हेडलैम्प्स में हैलोजन बल्ब का इस्तेमाल किया जाता है। हैलोजन बल्ब सस्ते होने के साथ 1,000 घंटे की लाइफ वाले होते हैं और उनकी रौशनी टंगस्टन बल्ब से तेज होती है। हैलोजन बल्ब आमतौर पर 55 वाट पॉवर का इस्तेमाल करते हैं।

रिफ्लेक्टर हेडलाइट के कुछ फायदे
- अक्सर रिफ्लेक्टर हेडलाइट वाली कारों की कीमत कम होती है। इसलिए अधिकतर सस्ती कारों में रिफ्लेक्टर हेडलाइट दिए जाते हैं।
- खराब होने पर रिफ्लेक्टर हेडलाइट को रेप्लस करना कम खर्चीला होता है।
- रिफ्लेक्टर हेडलाइट कार के अंदर कम जगह लेते हैं, इस वजह से इन कारों के अंदर स्पेस अधिक मिलती है।
- रिफ्लेक्टर हेडलाइट से निकलने वाली रौशनी का फैलाव अधिक होता है जिससे सामने से आ रहे ड्राइवर्स चकाचौंध हो जाते हैं।
- ज्यादातर रिफ्लेक्टर हेडलाइट तेज रौशनी नहीं देते। इनकी रौशनी एचआईडी हेडलाइट से काफी कम होती है, जिसमे बदलाव नहीं किया जा सकता।
- रिफ्लेक्टर हेडलाइट की रौशनी में कई बार डार्क स्पॉट भी दिखते हैं जिससे सड़क ठीक तरह से नहीं दिखती।
- ये सामने से आ रहे ड्राइवर्स को चकाचौंध नहीं करते। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इनमें रौशनी का फैलाव कम होता है।
- ये हेडलाइट रौशनी को एक जगह फोकस करते हैं जिससे सड़क पर ड्राइवर को सामने से आ रही गाड़ियां ठीक तरह से दिखती हैं।
- प्रोजेक्टर हेडलाइट्स में Xenon HID बल्ब का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें लो और हाई बीम में बेहतर रौशनी मिलती है।
- प्रोजेक्टर हेडलैंप अधिक महंगे होते हैं। इसलिए ऐसे हेडलैम्प्स कार के टॉप मॉडल या महंगी कारों में मिलते हैं।
- ये हेडलैंप महंगे होते हैं इसलिए इनके खराब होने पर इन्हे रेप्लस करने में खर्च अधिक होता है।

रिफ्लेक्टर हेडलाइट के नुकसान

प्रोजेक्टर हेडलैंप
प्रोजेक्टर हेडलैम को 1980 के दशक में लग्जरी कारों के साथ लॉन्च किया गया था और अब ये कुछ सस्ती कारों में भी मिलने लगे हैं। कई मायनों में प्रोजेक्टर हेडलाइट रिफ्लेक्टर हेडलैम के जैसे ही होते हैं। इन हेडलैम्प्स में भी स्टील के केस में बल्ब लगा होता है और रिफ्लेक्टर का काम मिरर करते हैं। लेकिन, इसमें एक लेन्स भी होता है जो मैग्नीफाइंग ग्लास का काम करता है। ये हेडलाइट की रौशनी बढ़ाती है। इसमें एक कटऑफ शील्ड भी होता है जो इस बात को सुनिश्चित करता है की लाइट रोड की तरफ जाए।

प्रोजेक्टर हेडलाइट के फायदों में ये बातें शामिल हैं -

प्रोजेक्टर हेडलाइट के कुछ नुकसान-


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