हायपरलूप से 1000 km का सफर एक घंटे में होगा पूरा, जल्द ही देश में शुरू होगा ये प्रोजेक्ट
वर्जिन ग्रुप की हायपरलूप तकनीक का पिछले कुछ वर्षों डेवलपमेंट और ट्रायल किया जा रहा है। इस तकनीक की मदद से हजारों किलोमीटर के सफर को महज कुछ ही मिनटों में पूरा किया जा सकता है। इस टेक्नोलॉजी के सफल होने पर दुनिया भर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। हायपरलूप सिस्टम में पैसेंजर या कार्गो पॉड्स 1,000 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक की रफ्तार पर सफर करते हैं।

यह स्पीड एक साधारण ट्रेन तुलना में कई गुना ज्यादा है। इससे यात्रा में समय की काफी बचत हो सकती है। हायपरलूप से दुनियाभर के विभिन्न शहरों के बीच यात्रा करने के समय का खुलासा किया गया है। हायपरलूप की वेबसाइट पर रूट एस्टिमेटर के अनुसार, दिल्ली से मुंबई की लगभग 1,153 किलोमीटर की दूरी को केवल 1 घंटा 22 मिनट में पूरा किया जा सकता है।

कैसे काम करता है हायपरलूप?
हायपरलूप पॉड्स ट्यूब में ट्रैवल करता हैं जहां वैक्यूम होती है। ये पॉड्स स्पीड को बढ़ाने के लिए मैग्नेटिक लेविटेशन और प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं। ट्रेन की तरह ही ये पॉड्स एक साथ ट्रैवल कर सकते हैं लेकिन इनके आपस में जुड़े नहीं होने के कारण ये अलग-अलग लोकेशंस पर जा सकते हैं। वर्जिन हायपरलूप सिस्टम एयरलॉक्स का इस्तेमाल करता है जिससे इसमें सुरक्षा अधिक रहती है।

इमरजेंसी की स्थिति में पैसेंजर के बाहर निकलने के लिए ट्यूब में प्रत्येक 75 मीटर पर इमरजेंसी एग्जिट होगा। पर्यावरण के लिहाज से भी यह टेक्नोलॉजी अच्छी है और इससे बहुत कम पॉल्यूशन होता है।

बेंगलुरु में शुरू हो सकता है पहला हायपरलूप नेटवर्क
भारत में वर्जिन हायपरलूप ने बेंगलुरु में प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने के लिए कर्नाटक सरकार के साथ समझौता ज्ञापन में हस्ताक्षर किया है। कंपनी बेंगलुरु एयरपोर्ट को शहर इलाकों से जोड़ने के लिए हायपरलूप नेटवर्क का विकास करेगी। इस हायपरलूप की मदद से प्रतिघंटा 1,000 यात्रियों को बेंगलुरु एयरपोर्ट से सिटी सेंटर तक ले जाया जा सकता है। यह हायपरलूप 1,080 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलेगी।

वर्जिन हायपरलूप ने कहा कि निर्माण कार्य समाप्त होने के बाद यात्री हायपरलूप पोर्टल पर इसकी बुकिंग करा सकेंगे। इसके साथ ही यात्री बेंगलुरु शहर में सुपरफास्ट स्पीड से यात्रा करने का भी आनंद उठा सकेंगे। कंपनी ने बताया कि हायपरलूप के निर्माण से एयरपोर्ट के नजदीक यातायात संबंधी परेशानियों से निजात मिलेगी, साथ ही गुड्स अथवा कूरियर सेवाओं को भी तेज किया जा सकेगा।

हायपरलूप से किया गया मानव परीक्षण
हायपरलूप से पहला मानव परीक्षण अमेरिका के लॉस वेगास में किया गया जो सफल रहा। इस हायपरलूप में पहली बार सवारी करने वाले और कोई नहीं बल्कि कंपनी के मुख्य तकनीकी अधिकारी जॉश गीजेल और यात्री अनुभव प्रमुख सारा लुचीऑन थीं।

लगभग 500 मीटर और 3.3 मीटर व्यास के हायपरलूप ट्रैक को खासतौर पर टेस्टिंग के लिए तैयार किया गया था। टेस्टिंग के दौरान हायपरलूप को 160 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पर चलाया गया। कंपनी ने दावा किया कि अब इस हायपरलूप को 400 से अधिक बार टेस्ट किया जा चुका है।


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