Ratan Tata का 86 वर्ष की उम्र में निधन, दिग्गज उद्योगपति ने दिलाई थी Auto Industry को अलग पहचान
Ratan Tata Death News: देश के जाने-माने उद्योगपति और ऑटो इंडस्ट्री के दिग्गज रतन टाटा नहीं रहे। 86 वर्ष की आयु में गुरुवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उनका निधन हो गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिग्गज उद्योगपति को अचानक ब्लड प्रेशर घटने के बाद भर्ती कराया गया था।
Ratan Tata ने भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को अलग पहचान दिलाई है। उन्होंने अपने कार्यकाल में कई ऐतिहासिक कार्य किए। अपने इस लेख में हम ऑटो इंडस्ट्री के लिए उनके द्वारा उठाए गए कुछ प्रमुख कदमों पर नजर डालेंगे।

देश की पहली पैसेंजर कार: 10 जनवरी 1998 को टाटा मोटर्स ने रतन टाटा के नेतृत्व में भारत की पहली पूर्ण स्वदेशी पैसेंजर कार पेश की। इसे टाटा इंडिका नाम दिया गया। उस समय Tata Indica की एक्स शोरूम कीमत 2.95 लाख रुपये थी।
JLR का अधिग्रहण: रतन टाटा का डंका देश ही नहीं विदेशों भी बजा है। 26 मार्च 2008 को टाटा मोटर्स ने फोर्ड से जगुआर और लैंड रोवर का अधिग्रहण किया। ऑटोमोबाइल उद्योग में टाटा की वैश्विक उपस्थिति का विस्तार होने के साथ ऐसा पहली बार था जब किसी भारतीय कंपनी ने अमेरिकी कार कंपनी को खरीदा हो।

Tata Nano की एंट्री: आम आदमी तक कार की चाबी पहुंचाने का श्रेय भी रतन टाटा को ही जाता है। 10 जनवरी 2009 को इनके नेतृत्व में टाटा नैनो लॉन्च की गई। ये दुनिया की सबसे सस्ती कार थी, जिसका उद्देश्य भारत में आम जनता को एक किफायती वाहन उपलब्ध कराना था।

शिक्षा और अनुभव: दिगग्ज कारोबारी रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 को हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सेंट जेवियर्स स्कूल, मुंबई से प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने 1962 में न्यूयॉर्क स्थित कोरनेल यूनिवर्सिटी से आर्किटेक्चर में बैचलर डिग्री ली।
रतन टाटा ने 1975 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एडवांस्ड मैनेजमेंट प्रोग्राम (AMP) पूरा किया। उनकी यह शिक्षा और अनुभव उन्हें व्यापार के क्षेत्र में एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं, जिसने उन्हें टाटा ग्रुप के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में मदद की। देश ने आज टाटा के रूप में 'रत्न' खोया है।


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