राजकोट: चलती जीप और स्कूटर पर महिलाओं का 'तलवार रास', वायरल वीडियो पर छिड़ी बहस

मंगलवार रात से ही राजकोट के नवरात्रि गरबा के कुछ नए वीडियो X (ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर छाए हुए हैं। इन वीडियो में क्षत्रिय राजपूत महिलाएं चलती स्कूटरों और खुली जीपों पर सवार होकर 'तलवार रास' (Sword Raas) करती दिख रही हैं। यह आयोजन रणजीत विलास पैलेस के परिसर में हुआ, जिसे स्थानीय तौर पर राजवी पैलेस भी कहा जाता है। पैलेस ग्राउंड में हुए इस प्रदर्शन में पारंपरिक युद्ध कला और गाड़ियों के संतुलन का अनूठा तालमेल नजर आया। 14 अक्टूबर को ये वीडियो तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद सुरक्षा और कानूनी नियमों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कई मीडिया संस्थानों ने इस कार्यक्रम की लोकेशन और समुदाय की भागीदारी की पुष्टि की है।

वायरल क्लिप्स में देखा जा सकता है कि एक महिला स्कूटर चला रही है, जबकि पीछे बैठी महिला हाथ में नंगी तलवार लहरा रही है। वहीं, कुछ अन्य महिलाएं खुली जीप में खड़ी होकर एक तय लय में तलवारबाजी का प्रदर्शन कर रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पूरा आयोजन पैलेस परिसर के भीतर ही हुआ, किसी सार्वजनिक सड़क पर नहीं। खबरों के अनुसार इसमें करीब 200 महिलाओं ने हिस्सा लिया, जिसे देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी थी। 12 अक्टूबर से ही सोशल मीडिया पर इसके वीडियो लगातार अपलोड किए जा रहे हैं। समाचार एजेंसी ANI ने भी पोस्ट किया, "राजवी पैलेस में क्षत्रिय राजपूत महिलाओं ने पारंपरिक तलवार रास का प्रदर्शन किया।"

Rajkot Talwar Raas Viral Video: Rajput Women Perform Sword Dance on Moving Vehicles in 2026

राजकोट तलवार रास: सुरक्षा और कानून पर उठे सवाल

इन वीडियो में ज्यादातर महिलाएं बिना हेलमेट के दिख रही हैं, जिससे मोटर वाहन अधिनियम की धारा 129 के पालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके अलावा, हाथ में तलवार लेकर गाड़ियों की पिछली सीट पर खड़े होकर प्रदर्शन करना खतरनाक ड्राइविंग के दायरे में आ सकता है। धारा 184 के तहत ऐसी ड्राइविंग पर जुर्माना और सजा का नियम है जो दूसरों की जान खतरे में डाले या सड़क पर चल रहे लोगों के लिए जोखिम पैदा करे। अदालतों का यह भी मानना है कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत ऐसी निजी जगहें भी सार्वजनिक स्थान मानी जा सकती हैं, जहां आम लोगों की आसानी से आवाजाही हो। वहीं, 2019 के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के मुताबिक गाड़ियों में किसी भी तरह के स्ट्रक्चरल बदलाव (मॉडिफिकेशन) पर भी सख्त नियम लागू होते हैं।

आयोजकों और पुलिस का क्या है कहना?

स्थानीय रिपोर्ट्स की मानें तो यह प्रदर्शन पैलेस में आयोजित 'नवरात्रि रासोत्सव' का हिस्सा था। राजकोट बुलेटिन में 12 अक्टूबर को रणजीत विलास पैलेस से इसके सीधे प्रसारण (लाइव ब्रॉडकास्ट) की जानकारी भी दी गई थी। दूसरी ओर, पुलिस ने नवरात्रि के दौरान अनुमतियों, साउंड सिस्टम और भीड़ के व्यवहार को लेकर सामान्य एडवाइजरी जारी की है। गौरतलब है कि इसी साल मई में गुजरात में हेलमेट को लेकर बेहद सख्त चेकिंग अभियान भी चलाया गया था, जो ट्रैफिक नियमों के कड़ाई से पालन का संदेश देता है।

सोशल मीडिया पर यह वीडियो आने के बाद लोग दो हिस्सों में बंट गए हैं—कुछ लोग इसे सांस्कृतिक शान बता रहे हैं, तो कुछ सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं। ध्यान रहे कि जैसे ही वाहन किसी नियंत्रित परिसर से बाहर निकलते हैं, ट्रैफिक नियम पूरी तरह लागू होते हैं, इसलिए हेलमेट पहनना बेहद जरूरी है। सार्वजनिक सड़कों पर ऐसे स्टंट की नकल कभी न करें और चलती गाड़ियों के प्रदर्शन से दूरी बनाकर रखें। बैरिकेड्स, प्रशिक्षित मार्शल, स्पीड लिमिट और मेडिकल व्यवस्था के साथ ही अपनी समृद्ध परंपराओं को बिना किसी जोखिम के आगे बढ़ाया जा सकता है।

Article Published On: Wednesday, October 14, 2026, 17:55 [IST]
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