राजकोट के इस बिल्डर ने वाहन के फैंसी नंबर के लिए खर्च कर डाले 19.01 लाख रुपयें
भारत में वाहन खरीदना हर एक आम आदमी का सपना होता है। कई लोग बहुत संघर्ष के बाद अपने सपनों की वाहन की सवारी कर पाते है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते है, जिनके गैराज में लग्जरी वाहनों की कमी नहीं होती है।

इन लोगों के पास मर्सिडीज से लेकर ऑडी सभी ब्रांड के लग्जरी वाहन उपलब्ध होते है। ऐसे लोगों को वाहनों के लिए खर्च करने में भी संकोच नहीं होता है। वहीं देश में दूसरी स्थिति यह है कि कुछ लोग अपनी पहली वाहन खरीदने के लिए दिन-रात मेहनत करते है।

वाहन खरीदना और उसे संजोकर रखना भारतीय मीडिल क्लास लोगों के लिए आम बात है। लेकिन वहीं एलीट क्लास भारतीय के लिए वाहम खरीदना और उसके रखरखाव के लिए 5 लोगों को रखना आम बात है।

एलीट क्लास भारतीय लोगों के शौक की बात हो रही है, तो यहां बताना भी जरूरी है कि ये लोग वाहनों के नंबर भी एलीट, लग्जरी या प्रीमियम, जो भी शब्द आपको पसंद आएं वो इस्तेमाल कर लिजिए. क्योंकि इनके वाहनों के नंबर भी इन्ही शब्दों के आस-पास रहती है।

आप सोच रहे होंगे कि लेखक ऐसी बातें क्यो कह रहा है, तो जनाब भारत में बॉलीवुड सेलिब्रिटी के यूनिक नंबरों की खबर तो आपने हर रोज पढ़ी होगी। लेकिन भारत के आम आदमी वाहन के लिए करोड़ों रुपयें खर्च करने की कोई खबर शायद ही आप तक पहुंची हो।

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आज हम आपको गुजरात के एक ऐसे ही व्यक्ति के बारे में बताने जा रहे है। इनका नाम गोविंद परसाना है और यह गुजरात के राजकोट शहर के नागरिक है। ये पेशे से बिल्डर का काम करते है। कुछ वक्त पहले इन्होंने मर्सिडीज कार खरीदी है।

यहां तक सबकुछ अच्छा है। एक आम आदमी की तरह इन्होंने भी पैसे जोड़कर मर्सिडीज का सपना पूरा किया होगा। लेकिन कहानी में ट्वीस्ट तब आता है, जब गोविंद परसाना को वाहन के पंजकीरण नंबर के लिए वाहन की कीमत के बाराबर का 33 प्र्तिशत खर्च करना पड़ता है

दरअसल मर्सिडीज को पसंद करने वाले गोविंद को नंबर भी अपने पसंद का ही चाहिए था। इसके लिए उन्होंने आरटीओ दफ्तर में आवेदन भी दे रखा था। गोविंद परसाना को अपना पसंदीदा नंबर 0007 के रूप में चाहिए था। यहां 7गुजराती में लिखा गया भगवान गणेश का प्रतिनिधित्व करता है।

गोविंद परसाना ने इस बारे में कहा है कि मैंने नंबर 7 को हासिल करने के लिए गुजरात आरटीओ को 19.01 लाख रुपयें दिए है। यह गुजरात में अभी तक नंबर पाने के लिए दी रकम में सबसे अधिक है।

हालांकि मुझे अपने निवेश का पता नहीं चल पाया है और इस कारण मैंने मर्सिडीज की कीमत का 33 प्रतिशत पंजीकरण नंबर के लिए खर्च कर डाला है। मेरे पहले के वाहनों के लिए भी मुझे यही नंबर मिला है।

वहीं इस बात की पुष्टी गुजरात के सड़क परिवहन विभाग के अधिकारियों ने भी की है। उन्होंने यह साफ किया है कि परसाना द्वारा लगाई गई 19.01 लाख रुपयें की बोली अब तक गुजरात में लगाई बोली में सबसे अधिक है।

वहीं अधिकारियों का कहना है कि लोग अपनी पसंद की संख्या प्राप्त करने के लिए भारी मात्रा में भुगतान कर रहे हैं। एक अन्य मामला राजकोट स्थित पर्यटन और ट्रैवल ऑपरेटर उपेंद्र चुडासमा का है जिन्होंने अपने भाग्यशाली नंबर -1 को जीतने के लिए दूसरी सबसे बड़ी राशि का भुगतान किया और GJ3LB0001 पंजीकरण संख्या को हासिल कर लिया था।

वे बताते है कि "मैंने एक रेंज रोवर खरीदा और अपने भाग्यशाली नंबर के लिए 8.53 लाख रुपये का भुगतान किया। यह संख्या मेरे दिल के करीब है; पहले भी मैंने अपनी SUV के लिए एक ही नंबर खरीदने के लिए 3.5 लाख रुपये का भुगतान किया था।

अहमदाबाद में, इस साल जुलाई में खुलने वाली श्रृंखला के लिए सबसे अधिक बोली लगाने वाला क्लासिक नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड था। "फर्म ने 0001 नंबर के लिए 6.71 लाख रुपये का भुगतान किया है। अहमदाबाद आरटीओ के इतिहास में यह सबसे अधिक बोली है।

आरटीओ अधिकारी बताते है कि राज्य में 1, 7, 11, 9, 99 जैसे नंबरों के लिए अधिकतम प्रतिस्पर्धा है। इसके अलावा, लोग उन नंबरों के लिए प्रीमियम का भुगतान करते हैं जो उनके जन्मदिन, शादी की वर्षगांठ, बच्चे के जन्म और जीवन में इस तरह के अन्य मील के पत्थर से मेल खाते हैं।


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