पेंशन के पैसों से भर रहे हैं सड़कों के गड्ढे, हैदराबाद के ‘पाॅटहोल डाॅक्टर’ बचा रहे हैं लोगों की जान
सड़कों पर गड्ढों से हो रहे हादसों से लोगों को बचाने के लिए हैदराबाद के 73 साल के गंगाधर तिलक कतनम पिछले 11 वर्षों से सड़कों के गड्ढों को भर रहे हैं। इस काम में लगने वाले खर्च की भरपाई वह अपने पेंशन के पैसों से करते हैं। अपने इस काम के वजह से गंगाधर को पॉटहोल डॉक्टर के नाम से भी मशहूर हो चुके हैं। सड़कों के गड्ढें को भरने के इस काम में उनकी पत्नी भी साथ दे रही हैं।

गंगाधर कहना है कि वह पॉटहोल एम्बुलेंस नाम की एक कार चलाते हैं जिसमें गड्ढों को भरने का सारा सामान लेकर चलते हैं। शहर की सड़कों में जहां कहीं भी गड्ढे दीखते हैं वह उसे भरने की कोशिश करते हैं। उनका कहना है कि पिछले 11 सालों में वह सड़क पर 2,030 गड्ढों (पॉटहोल) को भर चुके हैं। इतने गड्ढों को भरने में उन्होंने 40 लाख रुपये खर्च किये हैं।

गंगाधर बताते हैं कि उन्होंने बढ़ते हादसों को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और सरकारी अधिकारीयों से सड़कों की मरम्मत करने की अपील की, लेकिन इसमें उन्हें कुछ खास सहयोग नहीं मिला। जिसके बाद उन्होंने खुद गड्ढों को भरने का फैसला किया और सामान जुटाकर काम शुरू कर दिया।

गंगाधर तिलक एक सेवानिवृत रेलवे कर्मचारी हैं। अपने रिटायरमेंट के बाद वह हैदराबाद में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने शहर की सड़कों को बेहतर बनाने के लिए गड्ढों को भरने का काम भी शुरू किया।

धीरे-धीरे यह काम उनका जूनून बन गया और वे नौकरी छोड़कर अपना पूरा समय सड़कों को बेहतर बनाने में देने लगे। गंगाधर के इस काम को देखकर कई समाजसेवी संस्थाएं भी उनके साथ मिलकर काम कर रही हैं। वे 'श्रमदान' नाम की एक संस्था भी चलाते हैं जो सड़कों को बेहतर बनाने का काम कर रही है।

वे बताते हैं कि वह इस काम के लिए किसी से भी चंदा या दान की मांग नहीं करते हैं। ऐसे लोग जो गड्ढों को भरने में योगदान देना चाहते हैं वह मदद के तौर पर उन्हें मरम्मत में लगने वाला सामान उन्हें दे देते हैं।

गंगाधर मानते हैं कि बढ़ती आबादी देश में कई समस्याओं की जड़ है और इसका समाधान हमें मिलकर ढूंढना होगा। उन्होंने बताया कि अगर हम एक दूसरे की मदद करें तो कई समस्याओं का हल आसानी से निकल सकता है।


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