पुलिस कब और क्यों जलाती है साईरन लाइट, जानें क्या होते हैं विभिन्न रंगों के महत्व
किसी मुजरिम या अपराधी को पकड़ने क्राइम सीन पर जा रही पुलिस की गाड़ी में रेड, ब्लू या वाइट लाइट लगे होते हैं क्या आप जानते हैं पुलिस इन अलग-अलग रंगों की लाइट्स का इस्तेमाल क्यों करती है? आज हम आपको बताएंगे की पुलिस की गाड़ी पर फ्लैश कर रही इन इमरजेंसी लाइटों का क्या मतलब होता है।

अगर पुलिस की गाड़ी में लाइट फ्लैश होती है तो इसका मतलब है की पुलिस वारदात की जगह पर जल्दी पहुंचना चाहती है। फ्लैश लाइट तब भी जलाई जाती है जब पुलिस किसी वारदात का निरक्षण कर रही होती है। पेट्रोलिंग कर रही पुलिस भी फ्लैश लाइट जलाकर लोगों को सावधान करती है।

साईरन लाइट के प्रकार
पुलिस की गाड़ी के लाइट बार में कम से कम दो रंगों के लाइट्स लगे होते हैं। इसमें लाल और नीली बत्ती का ज्यादा इस्तेमाल होता है। लाल बत्ती तत्काल आपातकाल का संकेत देती है। वहीं नीली बत्ती पुलिस की उपस्थिति को परिभाषित करती है और इसे बड़ी दूरी से आसानी से देखा जा सकता है।

सफेद रोशनी का उपयोग नाइट-शिफ्ट कर रही पुलिस द्वारा अंधेरे को रोशन करने या संदिग्धों पर रौशनी डालने के लिए किया जाता है। पुलिस पीले रंग की रोशनी तब जलाई जाती है जब गाड़ी धीमी होती है या व्यस्त सड़कों पर खड़ी रहती है। एक ही समय में इन सभी बत्तियों का उपयोग किया जा सकता है।

साईरन लाइट से संबंधीत उपकरण
पेट्रोलिंग ड्यूटी पर लगी पुलिस की गाड़ी के इमरजेंसी लाइट में रोटेटर लगे होते हैं। ये रोटेटर रौशनी को चारों दिशाओं में मोड़ देते हैं ताकि सभी दिशाओं में चमक फैल जाए। पुलिस की नई गाड़ियों में एलईडी फ्लैश लाइट का इस्तेमाल किया जाता है।

साईरन लाइट के उद्देश्य
सड़क पर रूटीन जांच के दौरान जब ट्रैफिक रोक दी जाती है तो, पुलिस लाइट जलाकर आने वाले वाहनों को सतर्क करती है। दुर्घटना के समय निरीक्षण कर रही पुलिस की गाड़ी में लाइट जलाए जाते हैं ताकि लोगों को पता चल सके की आगे कोई हादसा हुआ है और गाड़ी को धीमा करना या रोकना है।

अपराधियों का पीछा करते समय इमरजेंसी लाइट दूसरे वाहनों और पैदल चल रहे लोगों को रास्ता खाली करने की चेतावनी देती है। गाड़ी पार्क कर घर के अंदर जाने के समय भी इमरजेंसी लाइट का उपयोग किया जाता है।

लाइट के अतिरिक्त प्रकार
सफेद वर्दी या सिविल ड्रेस वाली पुलिस की गाड़ी में साईरन लाइट ऊपर नहीं बल्कि गाड़ी के अंदर लगे होते हैं। यह इसलिए क्योंकि किसी गुप्त मिशन पर जा रही पुलिस की गाड़ी जल्दी पहचान में नहीं आए। इन्हें तब जलाया जाता हैं जब अपराधी को रंगे हांथों पकड़ना हो।

गाड़ियों की चेकिंग में महत्व
दरअसल, देखा जाता है कि जब कोई गाड़ी नियम तोड़ कर भाग रही हो तब पुलिस उस गाड़ी का पीछा करती है और साईरन लाइट जला देती है। इससे पुलिस उस गाड़ी को रुकने का निर्देश देती है। पुलिस को अगर किसी चलती गाड़ी में कुछ संदिग्ध गतिविधि का अहसास हो तब भी पुलिस ऐसा करती है। हालांकि, भारत में ऐसा नहीं होता लेकिन अमेरिका और यूरोप के देशों की पुलिस ऐस कर सकती है।

यह तो रही पुलिस के साईरन लाइट की बात, इसके साथ ही आज हम आपके लिए पुलिस द्वारा उपयोग की जाने वाली कुछ प्रमुख कार व बाइक की भी जानकारी लेकर आये हैं. भारत में अभी भी कई पुराने वाहन मॉडल इस्तेमाल किया जाता है लेकिन फोर्स में कई नए मॉडल भी जोड़े गये हैं. आइये जानते हैं इनके बारें में.

टोयोटा इनोवा देश भर में पुलिस बलों द्वारा सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली कारों में से एक है। इनोवा विश्वसनीय होने के साथ कंफर्ट भी प्रदान करती है। यह 7 यात्रियों को आसानी से ले जा सकती है तथा देश भर में पुलिस द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सबसे आम कारों में से एक है। पुलिस बल इस एमपीवी का इस्तेमाल अपने अधिकांश दैनिक गश्त कार्यक्रम के लिए करते हैं। इसे दिल्ली पुलिस, यूपी पुलिस, आंध्र प्रदेश पुलिस, तमिलनाडु पुलिस इस्तेमाल में लाती है।

टोयोटा इनोवा के बाद भारत में बिक्री के मामले में मारुति अर्टिगा दूसरी सबसे अच्छी एमपीवी है। भले ही यह टोयोटा एमपी से छोटी है, लेकिन काफी बेहतर इंटीरीयर स्पेस प्रदान करती है और अधिकतम 7 अधिकारियों को ले जा सकती है। कॉम्पैक्ट आकार इसे इनोवा से एक कदम आगे बढ़ता है। यह भीड़-भाड़ वाले इलाकों और तंग रास्तों पर भी आसानी से चल सकती है। फिलहाल चंडीगढ़ पुलिस, हरियाणा पुलिस, मुंबई पुलिस, बैंगलोर पुलिस इसे इस्तेमाल में ला रही है।

फोर्ड इकोस्पोर्ट एक कॉम्पैक्ट एसयूवी है जो चलाने में मज़ेदार और काफी शक्तिशाली है। लंबी हाइवे हो या तीखी मोड़ वाली सड़कें यह एसयूवी सब संभाल सकती है। इसकी इसी खासियत के कारण यह आंध्र प्रदेश पुलिस द्वारा इस्तेमाल में लाई जा रही है।

बाइक की बात करें तोबजाज पल्सर देश की सबसे लोकप्रिय बाइक्स में से एक है। यह आधिकारिक कार्यों के लिए पंजाब और दिल्ली पुलिस बलों द्वारा उपयोग में लायी जाती है। जाहिर तौर पर, दिल्ली पुलिस द्वारा उपयोग किए जाने वाले पल्सर में कोई सीमांत नहीं होता है। इसके साथ ही उपयोग में लायी जाने वाली अधिकांश बाइक पल्सर 180 मॉडल होती है। यह प्रदर्शन बेहतर और रखरखाव पर कम लागत आती है।

गुजरात और कोलकाता पुलिस शायद देश में सबसे प्रीमियम बाइक का उपयोग करती है, जो हार्ले डेविडसन स्ट्रीट 750 है। राज्य देश में सबसे पहले हार्ले डेविडसन बाइक को अपने आधिकारिक पुलिस बल में शामिल किया गया था और इसके बाद कोलकाता पुलिस ने इसका इस्तेमाल किया।

टीवीएस अपाचे देश में एक लोकप्रिय मोटरसाइकिल है और अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी बजाज पल्सर की तरह, इसका उपयोग कई राज्यों के पुलिस बलों द्वारा भी किया जाता है। इसमें दिल्ली, नोएडा, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं। इन राज्यों में पुलिस अपाचे आरटीआर 160 और 180 का उपयोग अपने क्षेत्रों में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंटरसेप्टर के रूप में करती है।


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