कोलकाता में पानी के बीच बनी Underwater Metro, प्रधानमंत्री मोदी ने किया उद्घाटन, जानें खासियत
भारत बुनियादी ढांचे के मामले में बड़े पैमाने पर विकास कर रहा है। देशभर में एक्सप्रेसवे और पुल बनाए जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कोलकाता में देश की पहली अंडरवाटर मेट्रो का उद्घाटन किया।
बता दें कि यह मेट्रो हुगली नदी में बनी सुरंग से होकर गुजरेगी। इस मेट्रो के जरिए नदी के दोनों सिरों पर बसे दो बड़े शहरों हावड़ा और कोलकाता को जोड़ा गया है। यह मेट्रो लाइन कुल 4.8 किलोमीटर की दूरी तय करेगी।

रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रोजेक्ट पर 4965 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इस लाइन पर मेट्रो ट्रेन अधिकतम 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है। कुछ दिन पहले ही रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कोलकाता मेट्रो रेल (Kolkata Underwater Metro) सेवाओं की समीक्षा की थी
बता दें कि इस रूट पर हुगली नदी के नीचे 520 मीटर लंबी मेट्रो सुरंग है। ये सुरंग नदी की सतह से 13 मीटर नीचे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अंडरवाटर मेट्रो में लोगों को 5G इंटरनेट की सुविधा भी मिलेगी।

पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर इस बारे में पोस्ट कर कहा, 'कोलकाता के लोगों के लिए यह खास दिन है। शहर के मेट्रो कनेक्टिविटी नेटवर्क का विस्तार किया गया है, जिससे यातायात की भीड़ कम हो गई है।'
'उन्होंने कहा कि हावड़ा-एस्प्लेनेड मेट्रो सेक्शन में देश की पहली जल सुरंग होना गर्व की बात है।' बता दें कि अप्रैल 2023 में, कोलकाता मेट्रो ने पानी की सुरंग में मेट्रो ट्रेन चलाकर एक नया मील का पत्थर हासिल किया था।

अब इस जल सुरंग का आधिकारिक उद्घाटन हो गया है। अनुमान है कि इस रुट पर औसतन करीब 30,000 लोग यात्रा कर सकते हैं। इस मेट्रो टनल का काम 2017 में शुरू हुआ था। इसके साथ ही हावड़ा मेट्रो स्टेशन भारत का सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन बन गया है।
अटल सेतु की सौगात: इससे पहले 12 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे लंबे समुद्री पुल 'अटल सेतु' का उद्घाटन किया था। यह पुल मुंबई के सेवरी को रायगढ़ जिले के न्हावा शेवा इलाकों से जोड़ता है।
इससे यात्रा का समय 2 घंटे से घटकर 30 मिनट हो गया है और यह मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे से भी जुड़ गया है जो महाराष्ट्र के 2 प्रमुख शहरों को जोड़ता है। यह 'अटल सेतु' जिसे मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक कहा जाता है, 21.8 किलोमीटर लंबा है।
इसमें 6 लेन की सड़क है, जिनमें से समुद्र में 16.50 किमी और जमीन पर 5.50 किमी निर्मित है। अटल सेतु की क्षमता प्रतिदिन लगभग 70,000 वाहनों को संभालने की है। पुल के निर्माण में 177,903 मीट्रिक टन स्टील का इस्तेमाल किया गया था।


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