पीएम मोदी ने पानीपत में किया जैव-ईंधन प्लांट का उद्घाटन, हर साल 3 करोड़ लीटर इथेनाॅल होगा तैयार
विश्व जैव ईंधन दिवस (World Biofuel Day) के अवसर पर, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हरियाणा के पानीपत में निर्मित एक दूसरी पीढ़ी की इथेनॉल संयंत्र राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर बोलते हुए, पीएम मोदी ने कहा, "प्रकृति की पूजा करने वाले हमारे देश में, जैव ईंधन प्रकृति की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। हमारे किसान इसे बेहतर समझते हैं। हमारे लिए जैव ईंधन का मतलब पर्यावरण को बचाने वाला हरित ईंधन है।"

उन्होंने कहा कि "नए जैव-ईंधन संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं, इससे रोजगार मिलेगा और नए अवसर पैदा होंगे। इथेनॉल के उत्पादन से सभी ग्रामीण, किसान लाभान्वित होंगे। इससे प्रदूषण की चुनौतियों में भी कमी आएगी।

900 करोड़ की लागत से तैयार हुआ प्लांट
पीटीआई के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने इस प्लांट को तैयार करने के लिए 900 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च किया है। इसका प्लांट की स्थापना देश में जैव ईंधन के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है।

हर साल 3 करोड़ लीटर जैव-ईंधन होगा तैयार
स्वदेशी तकनीक के आधार पर यह परियोजना सालाना लगभग दो लाख टन चावल के भूसे का उपयोग करके सालाना लगभग तीन करोड़ लीटर जैव ईंधन यानी इथेनॉल का उत्पादन किया जाएगा। इथेनॉल को तैयार करने में कृषि-फसल अवशेषों का अंतिम उपयोग होगा जिससे किसान सशक्त होंगे और उन्हें अतिरिक्त आय सृजन का अवसर मिलेगा।

यह परियोजना संयंत्र संचालन में शामिल लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करेगी और चावल के भूसे की कटाई, परिवहन, भंडारण आदि के लिए आपूर्ति श्रृंखला में अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होगा। चावल के भूसे का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने के लिए किए जाने से पराली जलाने के मामलों में कमी आएगी।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह परियोजना प्रति वर्ष लगभग 3 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के बराबर ग्रीनहाउस गैसों को कम करने में योगदान देगी, जिसे देश की सड़कों पर सालाना लगभग 63,000 कारों को बदलने के बराबर समझा जा सकता है।

जैव-ईंधन को तैयार करने के लिए कई तरह के जैविक उत्पादों का उपयोग किया जाता है। आमतौर पर इसे तैयार करने के लिए मक्के, गन्ने और चावल की फसल का उपयोग किया जाता है। कई देशों में जैव-ईंधन (इथेनॉल) को तैयार करने के लिए जट्रोफा (Jatropha) का इस्तेमाल किया जाता है, जो एक तरह का पौधा है।

जैविक उत्पादों को जैव-ईंधन बनाने वाली फैक्ट्री में कई चरणों में रासयनिक प्रोसेसिंग की प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इन फैक्ट्रियों से अंतिम उत्पाद के तौर पर जैव-ईंधन निकलता है जिसकी कैलोरिफिक वैल्यू यानी ऊर्जा पैदा करने की क्षमता पेट्रोल से कम होती है लेकिन इनके जलने पर कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य जहरीली गैसों का उत्सर्जन भी कम होता है।


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