पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम होने का कर रहे हैं इंतजार? जानें नितिन गडकरी ने तेल की कीमतों पर क्या कहा
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का मानना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी गिरावट की संभावना है, लेकिन ऐसा होने के लिए सामूहिक निर्णय की जरूरत होगी। टाइम्स नाउ समिट में ईंधन की बढ़ती कीमतों को रेखांकित करते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि अगर केंद्रीय वित्तीय मंत्री निर्मला सीतारमण पेट्रोल और डीजल की कीमतों को उत्पाद एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाएं तो लोगों को ईंधन की बढ़ती कीमतों से रहत मिल सकती है।

केंद्र सरकार ने इस महीने की शुरुआत में पेट्रोल पर 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क में कटौती की थी। कई राज्य सरकारों ने भी वैट में कटौती की। लेकिन पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी भी कुछ महीने पहले की तुलना में काफी अधिक हैं।

गडकरी ने कहा है कि अगर पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों को एकल राष्ट्रव्यापी जीएसटी व्यवस्था के तहत लाया जा सकता है, तो करों में और कमी आएगी, जिससे देश में ईंधन सस्ता हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद में, राज्यों के वित्त मंत्री भी सदस्य हैं। कुछ राज्य पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के खिलाफ हैं। गडकरी ने कहा, "अगर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी व्यवस्था के तहत लाया जाएगा, तो इन उत्पादों पर कर कम हो जाएगा और केंद्र और राज्यों दोनों के राजस्व में वृद्धि होगी।"

इस साल सितंबर में, जीएसटी परिषद ने पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे से बाहर रखने का फैसला किया था। जीएसटी परिषद ने कहा था कि पेट्रोलियम उत्पादों पर जीएसटी दरों को लागू करने का अभी सही समय नहीं है। जीएसटी परिषद के अनुसार, अगर पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाया गया तो इससे कर वसूली में कमी आएगी और सरकार का राजस्व कम होना शुरू हो जाएगा।

पेट्रोल और डीजल में वैट और सेवा शुल्क की कटौती के बाद अब पेट्रोल पर कुल कर 50 प्रतिशत और डीजल पर 40 प्रतिशत रह गया है। आपको बता दें कि दिवाली की पूर्व संध्या पर उत्पाद शुल्क में कटौती की घोषणा से पहले, दिल्ली में पेट्रोल पर कुल कर की 54 प्रतिशत था, जिसमें केंद्रीय उत्पाद शुल्क 32.90 रुपये प्रति लीटर और वैट 30 प्रतिशत था। इन कर घटकों से दिल्ली में पेट्रोल पर कुल कर 54 प्रतिशत था। अब पेट्रोल पर केंद्र सरकार के उत्पाद शुल्क में 5 रुपये की कटौती के साथ, कुल कर भार घटकर 50 प्रतिशत हो गया है।

इसी तरह, डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क 31.80 रुपये प्रति लीटर और वैट 16.75 प्रतिशत लिया जा रहा था। वहीं वायु परिवेश शुल्क 250 प्रति किलोलीटर की दर से लागू था। केंद्र सरकार द्वारा 10 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क में कटौती की घोषणा के बाद दिल्ली में डीजल पर कुल कर 48 प्रतिशत से घटकर पिछले 40 प्रतिशत रह गया है।

दिल्ली सरकार ने अभी तक अपनी वैट दरों में कमी नहीं की है। अगर ऐसा होता है तो राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल और डीजल पर टैक्स और कम हो जाएगा। इस बीच उत्पाद शुल्क में कटौती के कारण देश भर में मोटर ईंधन की कीमतों में कमी के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार तीसरे दिन स्थिर बनी हुई हैं।

बता दें कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है जिसके चलते ईंधन की खुदरा कीमत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ईंधन की बढ़ती कीमतों से राहत के लिए भारत सरकार सऊदी अरब और रूस जैसे तेल निर्यातक देशों से बातचीत कर रही है। हालांकि, इन वार्ताओं का अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है जिससे घरेलू बाजार में कीमतों को कम रखने के लिए मदद मिल सके।


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