कोलकाता से लद्दाख तक का सफर रिक्शे से तय करने का लक्ष्य
रोमांच से भरपूर और आसमान को चूमता हिमालय हमेशा से दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करता रहा है। लोग दुपहिया वाहनों से लेकर 4x4 गाड़ियों में सवार होकर हिमालय का लुत्फ उठाने आते हैं।
इन लिस्ट में सबसे नया नाम रिक्शा चालक सत्येन दास का है। चालीस वर्षीय सत्येन की दुनिया के सबसे ऊंचे सड़क मार्ग, खरडुंग-ला पर सफर करने की योजना है। इस सफर को और मजेदार बनाने के लिए सत्येन कोलकाता से यहां तक रिक्शा चलाकर पहुंचेंगे। जी हां, पैडल मारकर।
सत्येन, जो कोलकाता में लोगों को यहां से वहां ले जाने का काम करते हैं, बरसों की अपनी कमाई और कुछ चंदे की कमाई से अपनी जिंदगी के इस सबसे बड़े रोमांच को पूरा किया। कुछ कलपुर्जे और नक्शा सत्येन के सामान का हिस्सा रहे।

विनम्र सत्येन कहते हैं कि क्योंकि रिक्शा उनकी कमाई का इकलौता जरिया था और उन्होंने लगभग अपनी पूरी जिंदगी इसके साथ बिता दी थी, इसलिए वे अपने इस प्यारे रिक्शा के बिना खरडुंग-ला जाने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे।
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15 हजार रुपये खर्च कर सत्येन ने अपने रिक्शे को नया रूप दिया। इससे उसकी बॉडी हल्की बनी, रिक्शे में नये ब्रेक्स और टायर लगवाये गये। रिक्शा के साथ रोमांचक सफर पर जाने का यह सत्येन का पहला अनुभव नहीं है । इससे पहले भी 2008 में वह अपनी पत्नी और बेटी के साथ कुख्यात रोहतांग पास का सफर कर चुके हैं।
सत्येन की पत्नी और बीवी की देखभाल कर रहे उसके क्लब के साथियों ने कहा कि इस ट्रिप पर करीब 80 हजार रुपये का खर्च आया है। उन्होंने एक अकाउंट खुलवाया और कैश निकलवाने के लिए सत्येन को एटीएम कार्ड दे दिया।
सत्येन ने एक दिन में चालीस से पचास किलोमीटर की दूरी तय करने का लक्ष्य रखा है। उन्हें उम्मीद है कि पांच से छह महीनों में वे अपने इस सफर को पूरा कर लेंगे। फिलहाल वे उत्तर प्रदेश में हैं और जल्द ही वे श्रीनगर और फिर लद्दाख में दाखिल होंगे। अपने सफर से वापसी पर वे रोहतांग पास होते हुए मनाली आएंगे।
विश्व शांति का संदेश लेकर निकले सत्येन का लक्ष्य गीनिज बुक रिकॉर्ड्स में दर्ज होने का है। अशिक्षित सत्येन इस यात्रा को सीखने के एक शानदार मौके के तौर पर भी देख रहे हैं।


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