दिल्ली में 2 लाख से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों पर लगा बैन, परिवहन विभाग ने रद्द किया पंजीकरण
दिल्ली परिवहन विभाग ने जनवरी 2022 में 2 लाख पुराने डीजल वाहनों का पंजीकरण रद्द कर दिया है। एक सूचना के अनुसार, दिल्ली परिवहन विभाग के डेटाबेस से ऐसे डीजल वाहनों का पंजीकरण रद्द किया गया है जो 10 साल से ज्यादा पुराने थे। विभाग ऐसे डीजल वाहनों को नोटिस भी जारी कर रहा है जो 15 साल या उससे ज्यादा पुराने हैं। वाहन मालिकों से ऐसे वाहनों को स्क्रैप कराने का अनुरोध किया गया है।

विभाग ने बताया कि 10 साल की समय सीमा पार कर चुके डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलवाने की अनुमति दी जा रही है। इस तरह इन वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलकर ज्यादा समय तक के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है। हालांकि, पुराने वाहन दिल्ली में बैन कर दिए गए हैं लेकिन इन्हें दिल्ली के बाहर उन राज्यों में चलाने के लिए एनओसी (NOC) दिया जा रहा है जहां पुराने वाहनों पर प्रतिबंद नहीं है।

राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए दिल्ली सरकार ने 2016 में 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। पिछले साल दिल्ली सरकार ने अपने फैसले को दोहराते हुए राज्य में इन वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की सूचना जारी की थी। दिल्ली सरकार ने डीजल वाहनों की पंजीकरण अवधि को 15 वर्ष से घटाकर 10 वर्ष करने के लिए परिवहन कानून में संशोधन किया था।

पेट्रोल और डीजल वाहनों के लिए इलेक्ट्रिक किट के रेट्रोफिटमेंट की अनुमति से राष्ट्रीय राजधानी में इलेक्ट्रिक और शून्य-उत्सर्जन वाहनों को बढ़ावा देने में सहायता मिलेगी। दिल्ली परिवहन विभाग उन निर्माताओं को सूचीबद्ध कर रहा है जो पारंपरिक आईसीई (ICE) वाहनों को इलेक्ट्रिक व्हीकल में बदलने के लिए इलेक्ट्रिक किट बनाते हैं।

दिल्ली-राज्यक्षेत्र में गंभीर वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण वाहनों से होने वाला उत्सर्जन है। इसमें डीजल से चलने वाले कमर्शियल वाहनों की अहम भूमिका है। डीजल वाहन को इलेक्ट्रिक में बदलने के बाद वाहन मालिक दिल्ली सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत मिलने वाली सब्सिडी और छूट का लाभ उठा सकते हैं।

बता दें कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 2300 इलेक्ट्रिक बसों को चलाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने पिछले सप्ताह हरी झंडी दिखा कर राज्य में पहली इलेक्ट्रिक बस सेवा का सुभारम्भ किया। इन 2,300 इलेक्ट्रिक बसों में से 1,300 की खरीद डीटीसी द्वारा की जाएगी और बाकी 1,000 बसों को क्लस्टर योजना के तहत शामिल किया जाएगा।

दिल्ली सरकार फरवरी से हर महीने करीब 50 बसों को ई-बसों के जत्थे में जोड़ा जाएगा। दिल्ली सरकार इन ई-बसों के लिए बस डिपो को चार्जिंग स्टेशनों से लैस करेगी। यह काम कई चरणों में किया जाएगा। इसके अलावा, डीटीसी चार हाइब्रिड बस डिपो बनाएगी, जो इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों का एक संयोजन होगा। ये हाइब्रिड बस डिपो सुभाष प्लेस, राजघाट, हसनपुर और बवाना में बनाए जाएंगे। दिल्ली में ई-बसों को शामिल करने की योजना की घोषणा पहली बार जुलाई, 2018 में की गई थी।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार कैब एग्रीगेटर कंपनियों के लिए नई नीतियों की घोषणा की है, जिसके तहत अब दिल्ली में कैब कंपनियों को अपने वाहनों के जत्थे में 50 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों को रखना होगा। दिल्ली सरकार की एक सूचना के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मार्च 2023 तक सभी कैब एग्रीगेटर कंपनियों को अपने दो-पहिया वाहनों के बेड़े में 50 फीसदी और चार-पहिया वाहनों के बेड़े में 25 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करना अनिवार्य होगा।

दिल्ली के ट्रांसपोर्ट मंत्री कैलाश गहलोत ने शनिवार को एक ट्वीट में कहा है कि यह निर्णय एग्रीगेटर उद्योग को पर्यावरण के अनुकूल बनने के लिए लिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 60 दिनों तक आपत्तियों का मूल्यांकन करेगी, जिसके बाद बाद अधिसूचना जारी की जाएगी।

एग्रीगेटर्स नीति के मसौदे के अनुसार, अंतिम नीति की अधिसूचना के तीन महीने के भीतर नए दोपहिया वाहनों में से 10 प्रतिशत और नए चार पहिया वाहनों के 5 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहन चलाना अनिवार्य होगा। इसके बाद, सभी नए दोपहिया वाहनों में से 50 प्रतिशत और सभी नए चार पहिया वाहनों में से 25 प्रतिशत को मार्च 2023 तक इलेक्ट्रिक होना आवश्यक होगा।


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