दिल्ली के बाद अब गुरुग्राम में भी लग सकती है पुराने वाहनों पर पाबंदी, पुलिस शुरू करेगी अभियान
दिल्ली के बाद अब गुरुग्राम में भी प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों पर पाबंदी लगाई जा सकती है। इसके लिए पुलिस ने जागरूकता फैलाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। जिससे ऐसे वाहनों को न चलाने की लोगों को समझ आए और पर्यावरण हो रहे नुकसान को कम किया जा सकें।

बता दें कि वाहनों के कारण बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को बैन करने का आदेश दिया है। जिसके बाद प्रदूषण से निपटने के लिए कई कदम उठाये जा रहे हैं।

हरियाणा पुलिस के अनुसार गुरुग्राम और फरीदाबार सहित हरियाणा के 14 जिले एनसीआर के अंतर्गत आते हैं, जिनमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहनों के इस्तेमाल को बंद करने का आदेश लागू होता है।

इस अभियान के तहत गुरुग्राम पुलिस टैक्सी स्टैंड, ऑटो स्टैंड और अन्य सार्वजनिक जगहों पर जागरूकता फैलाएगी। जागरूकता अभियान के दौरान, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने वाले लोगों पर यातायात नियमों का उल्लंघन करने के लिए मामला दर्ज किया जाएगा।

कानून तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
गुरुग्राम पुलिस के अनुसार जो लोग नियमों का पालन नहीं करेंगे उनके खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट के नियमों तहत कार्रवाई होगी। बता दें कि इसी महीने की शुरूआत में दिल्ली सरकार ने 15 साल से ज्यादा पुराने पेट्रोल वाहन और 10 साले से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों पर पाबंदी लगा दी है।

पुराने वाहनों के लिए लेनी होगी NOC
आपको बता दें कि देश में 10 साल पुराने डीजल वाहन और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहन को चलने के लिए एनओसी (NOC) लेनी पड़ती है। यह उन राज्यों में लागू होता है जहां पुराने वाहनों को चलाने में रोक नहीं है। लेकिन दिल्ली में शीर्ष न्यायालय ने आदेश जारी कर ऐसे वाहनों पर पूरी तरह रोक लगा दी है।

अब पीयूसी भी हुआ अनिवार्य
दिल्ली में सर्दियों से पहले प्रदूषण से निबटने के लिए राज्य में वैद्य पीयूसी सर्टिफिकेट (Pollution Under Control Certificate) को अनिवार्य कर दिया गया है। अब दिल्ली की सड़कों पर बिना पीयूसी के गाड़ी चलाने पर कार्रवाई हो सकती है। बगैर पीयूसी के वाहन चलाते पकड़े जाने पर 10,000 रुपये का जुर्माना 6 महीने की जेल या 3 महीने तक ड्राइविंग लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।

दिल्ली में परिवहन विभाग द्वारा 900 से अधिक अधिकृत प्रदूषण जांच केंद्र हैं, जो शहर भर में फैले पेट्रोल पंपों और कार्यशालाओं में स्थापित हैं। बता दें कि वाहनों का उत्सर्जन स्तर सही होने पर उन्हें पीयूसी सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। अगर वाहन का उत्सर्जन स्तर सीमा से अधिक हो तो ऐसे में उसे पीयूसी सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाता।

दिल्ली में लगभग 37 लाख वाहन ऐसे हैं जो एंड-ऑफ-लाइफ वाहन हैं या कबाड़ हो चुके हैं, लेकिन इनका उपयोग अभी भी किया जा रहा है। वर्तमान में दिल्ली में एक करोड़ से अधिक वाहन पंजीकृत हैं। दिल्ली हर साल प्रदूषण के गंभीर मुद्दों से जूझती है। सरकार ने इसके पीछे वाहन से होने वाले प्रदूषण को प्रमुख कारण ठहराया है।


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