पुरानी पड़ी बस को महिला टायलेट में किया परिवर्तित, होता है सोलर पॉवर का उपयोग
हमारे देश में अच्छी से अच्छी चीजों को कबाड़ में बदलने में समय नहीं लगता है लेकिन कबाड़ को एक उपयोग चीज बनाने में मेहनत और इरादा लगता है। हाल ही में कुछ ऐसा ही इरादा दिखाते हुए कर्नाटक के बैंगलोर में एक पुरानी बस को महिला टायलेट के रुप में परिवर्तित कर दिया गया है।

कर्नाटक स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन ने इस बस को महिला टायलेट के रूप में परिवर्तित किया है, हालांकि इसका खर्चा बैंगलोर इंटरनेशनल एयरपोर्ट अथॉरिटी ने अपनी कॉर्पोरेट सोशल रेस्पोंसिबिलिटी के तहत उठाया है। इस पुरानी बस को महिला टायलेट बनाने में 12 लाख का खर्च उठाया है।

'स्त्री टायलेट' एक दोनों ही संस्था द्वारा चलाई जा रही एक योजना है, इसके तहत इस बस को मॉडिफाई किया गया है। इसे बैंगलोर के मैजेस्टिक सेन्ट्रल बस स्टैंड पर रखा गया है। इस बस में तीन भारतीय व दो वेस्टर्न टायलेट बनाये गये हैं।

इस महिला टायलेट में बेबी डायपर चेंजिंग एरिया, सेनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन दी गयी है। यह बस खुद से उत्पन्न की जाने वाली सोलर पॉवर का उपयोग करती है, इसमें सोलर सेनिंग लाइट, वाश बेसिन, बेबी फीडिंग एरिया दिया गया है।

राज्य कर परिवहन मंत्री ने इस महिला बस-टायलेट का उदघाटन किया है तथा इसे मैजेस्टिक बस स्टैंड पर रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य परिवहन निगम इस तरह की और कबाड़ हुई बसों को टायलेट में परिवर्तित करने की संभावनाओं की तलाश करेगी।

सामने आई तस्वीरों में देखा जा सकता है कि इस बस को अंदर व बाहर से पूरी तरह से मॉडिफाई किया गया है तथा शानदार बना दिया गया है। इसके लिए भीतर कई तरह के निर्माण किये गये हैं और अब यह भीड़ वाले इलाके में जनता के काम आ रहे हैं।

देश व राज्य में इस तरह से परिवहन निगमों की खराब वाहनों को मॉडिफाई करके टायलेट सहित अन्य काम में लाया जाना चाहिए। आरटीओ में सैकड़ो-हजारों वाहन पड़े-पड़े खराब हो जाती है, उन्हें भी इस तरह के उपयोग में लाया जाना चाहिए।

इसके साथ ही इस टायलेट बस में सोलर लाइट का उपयोग किया गया है, यानि इसमें अन्य किसी तरह का खर्चा भी नहीं होने वाला है। यह एक खराब होती चीज का एक बेहद शानदार उपयोग है।


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