अब निजी वाहनों पर नहीं लगेगा टोल टैक्स, इस राज्य की सरकार ने दी लोगों को बड़ी राहत
मध्य प्रदेश के निजी वाहन मालिकों को राहत की सांस देते हुए, मध्य प्रदेश राज्य सरकार ने निजी वाहन मालिकों से टोल टैक्स वसूली के नियम को खत्म करने का फैसला किया है। मौजूदा समय में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने प्रदेश में टोल प्लाजा पर अक्सर होने वाले भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति को कम करने के लिए निजी वाहन मालिकों को टोल टैक्स से छूट देने का फैसला किया है।

मध्य प्रदेश राज्य सरकार द्वारा लाए गए इस नए नियम के तहत राज्य सड़क विकास निगम के अंतर्गत आने वाली सभी नई और पुरानी सड़कों को शामिल किया गया है, जहां निजी वाहन मालिकों को अब टोल टैक्स नहीं देना होगा। राज्य परिवहन के प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई ने नई योजना की जानकारी दी है।

नीरज मंडलोई के अनुसार इस नए नियम के प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजा गया है। यह फैसला लेने से पहले लोक निर्माण विभाग ने राज्य की करीब 200 सड़कों का सर्वे किया है। इस सर्वे से पता चला कि लगभग 80 प्रतिशत टोल राशि कमर्शियल वाहनों से और शेष 20 प्रतिशत निजी वाहनों से एकत्र की जाती है।

हालांकि, टोल प्लाजा पर टोल राशि का भुगतान करने के लिए लाइन में लगे निजी वाहनों की संख्या कमर्शियल वाहनों की तुलना में बहुत ज्यादा होती है, जो अक्सर ट्रैफिक जाम और कमर्शियल वाहनों के लिए भीड़ का कारण बनता है। ऐसे में राज्य सरकार टोल प्लाजा पर भीड़ से बचने के लिए निजी वाहनों को टोल टैक्स मुक्त कर रही है।

लोक निर्माण विभाग द्वारा सर्वे के तहत ली गई सभी 200 सड़कों का निर्माण राज्य सड़क विकास निगम द्वारा बिल्ड ऑपरेट एंड ट्रांसफर (बीओटी) पद्धति से किया गया था। इस पद्धति के तहत, एक निजी कंपनी को राज्य सरकार द्वारा तय की गई एक निश्चित अवधि के लिए रखरखाव और विकास का काम सौंपा जाता है।

मध्य प्रदेश में अब से केवल कमर्शियल वाहनों को ही टोल टैक्स देना होगा। निजी वाहन मालिकों के अलावा राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रियों और संसद सदस्यों सहित वीआईपी के वाहनों को पहले से ही इस नियम से छूट दी गई है।

इन वीआईपी के अलावा, न्यायाधीशों, मजिस्ट्रेटों, केंद्र सरकार के सचिवों, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरणों के अधिकारियों, पुलिस, दमकल, एम्बुलेंस और रक्षा वाहनों को भी टोल प्लाजा पर करों का भुगतान करने से दूर रखा जाता है। बता दें कि भारत सरकार जीपीएस आधारित टोल कलेक्शन की योजना पर काम रही है।

जीपीएस आधारित टोल कलेक्शन सिस्टम के तहत ग्राहक हाईवे पर तय की गई दूरी के हिसाब से टोल का भुगतान करेंगे। नए कानून आनुपातिक आधार पर टोल वसूलेंगे। इसका मतलब है कि आप जितना अधिक राजमार्गों का उपयोग करेंगे, आपको उतनी ही अधिक राशि का भुगतान करना होगा। फिलहाल टोल बूथों पर स्टेप्ड रेट पर टोल वसूला जाता है।


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