अब Toll प्लाजा और Fastag से नहीं, इस खास सिस्टम से होगा Toll Collection! नितिन गडकरी ने दिया बड़ा अपडेट
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि सरकार मौजूदा राजमार्ग टोल प्लाजा को बदलने के लिए GPS-Based Toll Collection System सहित नई टेक्नोलॉजी को लागू करने की योजना बना रही है।
नितिन गडकरी ने एक 'X' पोस्ट में बताया कि वह जल्द ही Toll को खत्म करने जा रहे हैं। इसकी जगह Satellite Base toll system लेगा। सरकार के मुताबिक आप अपनी कार को जितनी देर टोल वाली हाइवे पर चलेंगे, उतना ही टोल टैक्स कलेक्ट किया जाएगा।

नया Toll कलेक्शन सिस्टम सेटेलाइट बेस्ड होगा। सरकार इसे जल्द से जल्द शुरू करने की तैयारी में है। हालांकि अभी इसको लेकर कोई डेडलाइन सामने नहीं आई है। नितिन गडकरी ने दिसंबर की शुरुआत में कहा था कि NHAI इसे मार्च 2024 तक लागू करने वाली थी।
ऐसे काम करेगा Satellite Base toll system : बता दें कि इस सिस्टम के तहत वाहन चालक हाइवे पर जितनी दूरी तय करेंगे, उनसे उतना ही टोल टैक्स कलेक्ट किया जाएगा। यह टोल टैक्स, बैंक अकाउंट से ऑटोमैटिक कट जाएगा।

FASTag के आने से कम हुआ है वेटिंग टाइम : साल 2018-19 के दौरान टोल प्लाजा पर वाहनों को औसतन आठ मिनट का इंतजार करना पड़ता था। साल 2020-21 और साल 2021-22 में फास्टैग व्यवस्था लागू होने से यह समय घटकर महज 47 सेकंड हो चुका है।
कुछ जगहों पर खासकर शहरों के पास घनी आबादी वाले कस्बों में टोल प्लाजा पर वेटिंग समय में काफी सुधार हुआ है, फिर भी ज्यादा भीड़ के वक्त यह समय बढ़ जाता है।
गडकरी ने यह भी कहा कि न्यू टोल कलेक्शन सिस्टम यात्रियों से उनके द्वारा तय की गई दूरी के आधार पर टैक्स वसूलने में भी मदद करेगा। हालांकि यह कितना सफल होगा यह तो सिस्टम चालू होने के बाद ही पता चलेगा।
भारी वाहनों के लिए अलग टोल: इसके अलावा एक अन्य योजना पर सरकार विचार कर रही है, भारी वाहनों पर उनके वजन के आधार पर टोल दरें वसूलने की है। रिपोर्ट के मुताबिक ओवरलोडेड ट्रक सड़क पर चलने वालों के लिए कई तरह की समस्याएं पैदा कर रहे हैं।
क्या है Fastag: यह एक डिजिटल टोल कलेक्शन सिस्टम है। इसमें Radio Frequency Identification (RFID) टेक्नोलॉजी की मदद से QR को स्कैन किया जाता है, जिसके बाद ऑटोमैटिक पेमेंट हो जाता है।


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