गौतम बुद्ध नगर में 1.25 लाख पुराने वाहनों पर लगेगा प्रतिबंध, एनजीटी का आदेश
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) को प्रदूषण मुक्त बनाने के प्रयास में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहन और 15 साल से ज्यादा पुराने पेट्रोल वाहनों को हटाने का आदेश दिया था। एनजीटी के इसी आदेश से अब दिल्ली के गौतम बुद्ध नगर से 1.25 लाख पुराने वाहनों का पंजीकरण रद्द करने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। गौतमबुद्ध नगर जिले के परिवहन विभाग ने उत्तर प्रदेश सरकार के एक आदेश के बाद 1 अक्टूबर से ऐसे वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने का अभियान शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के प्रमुख शहरों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने यह नियम बनाया है।

क्या होगा पुराने वाहनों का?
जानकारी के अनुसार, इन वाहनों को या तो रद्द किया जाएगा या उनके उपयोग के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी किया जाएगा ताकि उनका इस्तेमाल कुछ चुनिंदा जिलों में किया जा सके जो एनसीआर के अंतर्गत नहीं आते हैं। पुलिस ने ऐसे वाहनों की धड़पकड़ करने के लिए अभियान तेज कर दिया है।

उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश में कहा गया है कि बेहतर वायु गुणवत्ता वाले 34 जिले ऐसे हैं जहां ऐसे वाहनों को उनके संबंधित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों से एनओसी जारी करने के बाद स्थानांतरित किया जा सकता है। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गौतम बुद्ध नगर में 1 अक्टूबर को 94,299 डीजल और 7,31,811 पेट्रोल सहित 8,26,110 वाहन पंजीकृत थे।

पुराने पेट्रोल-डीजल वाहन होंगे रद्द
जानकारी के अनुसार, कुल 1,34,073 वाहनों (लगभग 15 प्रतिशत) को ग्रीन ट्रिब्यूनल नियमों और राज्य सरकार के आदेश के अनुपालन में अपंजीकृत किया जाएगा। इनमें 25,238 डीजल और 1,08,835 पेट्रोल से चलने वाले वाहन शामिल हैं।

एनसीआर से पुराने वाहनों को हटाने पर ग्रीन ट्रिब्यूनल के 2016 के दिशानिर्देश को दोहराते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि पुराने वाहनों का पंजीकरण रद्द करने के आदेश को प्रभावी ढंग से और बिना किसी चूक के पालन किया जाएगा।

आदेश में कहा गया कि अपंजीकृत वाहनों को दिल्ली/एनसीआर में चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, अधिकारी ऐसे वाहनों को दिल्ली/एनसीआर के बाहर पंजीकृत करने के लिए एनओसी जारी करेंगे। ट्रिब्यूनल ने कहा कि हर राज्य को उन क्षेत्रों की पहचान करनी चाहिए जहां हवा का फैलाव अधिक है और वाहनों का घनत्व सबसे कम है।

ऐसे वाहनों को नहीं मिलेगी एनओसी
ट्रिब्यूनल ने पुराने वाहनों पर फैसला सुनाते हुए कहा कि ऐसे डीजल वाहन जो 15 वर्ष से अधिक पुराने हैं और बीएस- I (भारत चरण) या बीएस- II अनुपालन कर रहे हैं, उन्हें रद्द कर दिया जाएगा और वाहनों के हस्तांतरण के लिए कोई एनओसी जारी नहीं किया जाएगा।

आदेश में कहा गया है कि जिन 34 जिलों में एनसीआर से पुराने वाहनों को स्थानांतरित किया जा सकता है, उनमें इटावा, संत कबीर नगर, अंबेडकर नगर, कुशीनगर, फर्रुखाबाद, जौनपुर, कन्नौज, बलिया, सुल्तानपुर, गाजीपुर, मैनपुरी, प्रतापगढ़, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, श्रावस्ती, औरैया, सोनभद्र, फतेहपुर, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर, बदायूं, बलरामपुर, हरदोई, बहराइच, उरई, एटा, कासगंज, महोबा, ललितपुर, चित्रकूट, हमीरपुर, अमेठी और बिजनौर शामिल हैं।


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